दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जिले के बेलखेड़ा थाना पुलिस पर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगे हैं। आरोप है कि गांव में हुए विवाद में गंभीर रूप से घायल 30 वर्षीय युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के बजाय पुलिस ने उसे परिजनों सहित करीब तीन घंटे तक लॉकअप में बंद रखा। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण युवक की अस्पताल में मौत हो गई, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।
जानकारी के अनुसार बेलखेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरिया कलां निवासी उमेश उर्फ इंदर (30) का सोमवार शाम गांव में कुछ लोगों से विवाद हो गया था। आरोप है कि विवाद के दौरान हमलावरों ने कृषि उपकरण ‘राइजर’ से उसके सिर पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिजनों का कहना है कि खून से लथपथ हालत में उमेश को लेकर वे न्याय और मदद की उम्मीद में बेलखेड़ा थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने घायल का इलाज कराने के बजाय उसे और साथ आए परिजनों को लॉकअप में बंद कर दिया। आरोप है कि लॉकअप में बंद रहने के दौरान उमेश लगातार खून की उल्टियां करता रहा और उसकी हालत बिगड़ती गई, जबकि समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।
परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना के आरोपी थाने के बाहर मौजूद रहे, जबकि घायल को हिरासत में रखा गया। बाद में हालत गंभीर होने पर उमेश को मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां बुधवार सुबह उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मौत की खबर मिलते ही पिपरिया कलां के ग्रामीण और परिजन बड़ी संख्या में बेलखेड़ा थाने पहुंच गए। उन्होंने शव को थाने में रखकर प्रदर्शन किया और मुख्य मार्ग जाम करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मामले पर एसडीओपी लोकेश डाबर ने बताया कि पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। घटना के दिन के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है तथा रिपोर्ट जल्द पुलिस अधीक्षक को सौंपी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जिस हमले में उमेश घायल हुआ था, उसकी एफआईआर 9 जून को दर्ज की जा चुकी है और अब युवक की मौत के बाद मामले में संबंधित धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
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