दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जिला अधिवक्ता संघ (कार्यकाल 2026-28) के चुनाव सोमवार को उस समय विवादों में घिर गए, जब मतदान के दौरान बैलेट पेपर में कथित अनियमितताओं को लेकर अधिवक्ताओं ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मतदान केंद्र पर हंगामे की स्थिति बन गई और अंततः चुनाव अधिकारी को मतदान प्रक्रिया निरस्त करने की घोषणा करनी पड़ी।
अधिवक्ताओं का आरोप था कि कई बैलेट पेपर पहले से ही सीलबंद थे। वहीं कुछ मतदान केंद्रों पर आवश्यक संख्या में बैलेट पेपर उपलब्ध नहीं थे, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई। इन आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं और चुनाव अधिकारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में हंगामे में बदल गई।
मतपत्र फाड़े जाने से और बिगड़ी स्थिति
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने मतपत्र भी फाड़ दिए, जिससे चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो गई। बैलेट पेपर कम होने और मतदान व्यवस्था में अव्यवस्था की शिकायतों के बीच चुनाव स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थिति लगातार बिगड़ती देख चुनाव अधिकारियों ने पहले मतदान रोक दिया और बाद में पूरे मतदान को निरस्त करने की घोषणा कर दी। मतदान रद्द होने के बाद भी अधिवक्ताओं के बीच काफी देर तक विरोध और बहस का दौर चलता रहा।
चुनाव अधिकारी की भूमिका पर भी उठे सवाल
हंगामे के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने चुनाव अधिकारी जी.एस. ठाकुर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि चुनाव निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से नहीं कराया जा रहा था, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। अधिवक्ताओं ने चुनाव अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया।
इसी बीच चुनाव अधिकारी जी.एस. ठाकुर ने मतदान प्रक्रिया निरस्त करने की घोषणा के साथ स्वयं को चुनाव प्रक्रिया के दायित्व से भी अलग कर लिया। उन्होंने जारी सूचना में उल्लेख किया कि चुनाव प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं रहा, इसलिए मतदान निरस्त किया जाता है तथा इस संबंध में राज्य अधिवक्ता परिषद को सूचना प्रेषित की जा रही है।
सुबह शांतिपूर्ण रहा मतदान, दोपहर बाद बढ़ा विवाद
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10:30 बजे मतदान शुरू हुआ था। दोपहर 12 बजे तक लगभग 20 से 25 प्रतिशत मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो चुका था। इसके बाद बैलेट पेपर को लेकर आपत्तियां सामने आने लगीं और विवाद बढ़ता गया।
मतदान शाम 5 बजे तक होना था, जबकि मतगणना अगले दिन प्रस्तावित थी, लेकिन हंगामे के कारण पूरी प्रक्रिया बीच में ही रोकनी पड़ी।
92 प्रत्याशी मैदान में, 3,313 अधिवक्ता मतदाता
इस चुनाव में विभिन्न पदों के लिए कुल 92 प्रत्याशी मैदान में थे। अध्यक्ष पद के लिए अभय शुक्ला, बाल्मीकि प्रसाद तिवारी, एच.आर. नायडू, ज्योति राय, मनीष मिश्रा और नरेंद्र जैन के बीच मुकाबला होना था।
इसके अलावा उपाध्यक्ष पद पर 10, महिला उपाध्यक्ष पर 3, सचिव पद पर 8, सह सचिव पद पर 5, कोषाध्यक्ष पद पर 4, पुस्तकालय सचिव पद पर 4 तथा कार्यकारिणी सदस्य के 21 पदों के लिए 51 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। संघ के कुल 3,313 अधिवक्ता मतदाताओं को मतदान करना था।
व्यवस्था के दावे, लेकिन अधिवक्ताओं ने जताई नाराजगी
चुनाव को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए बार परिसर में विशेष इंतजाम किए गए थे। मतदाताओं के प्रवेश के लिए गेट नंबर-4 निर्धारित किया गया था तथा बिना अधिवक्ता परिचय-पत्र (आई-कार्ड) के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। मतदान के लिए कुल 70 बूथ बनाए गए थे।
हालांकि, अधिवक्ताओं का आरोप है कि इन व्यवस्थाओं के बावजूद चुनाव प्रक्रिया में गंभीर खामियां रहीं, जिसके चलते निष्पक्ष मतदान संभव नहीं हो सका।
नई मतदान तिथि का इंतजार
मतदान निरस्त होने के बाद अब सभी की निगाहें जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव अधिकारियों और राज्य अधिवक्ता परिषद पर टिकी हैं। नई मतदान तिथि और आगे की चुनाव प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
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