दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। राज्यसभा सांसद पद के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में गुरुवार को जबलपुर तहसील कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधीवादी तरीके से धरना-प्रदर्शन किया। दोपहर 12 बजे शुरू हुआ यह धरना शाम 4 बजे तक चला, जिसमें कांग्रेस के नगर एवं ग्रामीण अध्यक्ष सौरभ शर्मा, संजय यादव सहित कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
धरने में मौजूद कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने भाजपा सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने अपना पूरा जीवन महिला सशक्तिकरण और गांधीवादी विचारधारा को समर्पित किया है, लेकिन उनके साथ अन्याय कर लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचाई गई है।
लखन घनघोरिया ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “भारतीय जनता पार्टी चाहे कचरे में जितना भी अभ्रक (चांदी का वर्क) लगा ले, कचरा मिठाई नहीं बन सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र और संविधान की मर्यादाओं को लगातार कमजोर करने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त बहुमत था, जबकि भाजपा के पास दो सीटों के लिए आवश्यक संख्या थी। इसके बावजूद भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक परंपराओं का उल्लंघन किया और कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश की। जब इसमें सफलता नहीं मिली तो नामांकन निरस्त कराने जैसा कदम उठाया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कलंकित करने वाला है।
पूर्व मंत्री ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया गया, वह हास्यास्पद प्रतीत होता है। उनके अनुसार या तो निर्वाचन अधिकारी को नियमों की सही जानकारी नहीं है या फिर यह भाजपा के दबाव का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर क्षेत्र में एकाधिकार स्थापित करना चाहती है और सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने धरने के माध्यम से निर्वाचन आयोग से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की।
धरने में मौजूद कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने भाजपा सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने अपना पूरा जीवन महिला सशक्तिकरण और गांधीवादी विचारधारा को समर्पित किया है, लेकिन उनके साथ अन्याय कर लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचाई गई है।
लखन घनघोरिया ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “भारतीय जनता पार्टी चाहे कचरे में जितना भी अभ्रक (चांदी का वर्क) लगा ले, कचरा मिठाई नहीं बन सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र और संविधान की मर्यादाओं को लगातार कमजोर करने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त बहुमत था, जबकि भाजपा के पास दो सीटों के लिए आवश्यक संख्या थी। इसके बावजूद भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक परंपराओं का उल्लंघन किया और कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश की। जब इसमें सफलता नहीं मिली तो नामांकन निरस्त कराने जैसा कदम उठाया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कलंकित करने वाला है।
पूर्व मंत्री ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया गया, वह हास्यास्पद प्रतीत होता है। उनके अनुसार या तो निर्वाचन अधिकारी को नियमों की सही जानकारी नहीं है या फिर यह भाजपा के दबाव का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर क्षेत्र में एकाधिकार स्थापित करना चाहती है और सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने धरने के माध्यम से निर्वाचन आयोग से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की।
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