दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी के भीतर मची भीषण भगदड़ के बीच बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी अपने पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। पिछले तीन दिनों के भीतर टीएमसी को लगने वाला यह दूसरा बड़ा झटका है; इससे पहले 8 जून को वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय ने भी राज्यसभा और पार्टी दोनों छोड़ दी थी।
हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में शिकस्त झेलने के बाद, 28 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बिखरने की कगार पर पहुंच गई है। बागी गुटों ने दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई से अधिक की संख्या जुटाकर खुद को ही असली टीएमसी बताना शुरू कर दिया है। वर्तमान स्थिति के अनुसार पार्टी में बड़ी टूट हो चुकी है:
लोकसभा में बड़ी सेंध: टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर संसद में एक अलग ब्लॉक के तौर पर बैठने की व्यवस्था मांगी है। अब ममता बनर्जी के पाले में सिर्फ 8 लोकसभा सांसद बचे हैं।
विधानसभा में तख्तापलट: राज्य विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं, लेकिन 3 जून को 58 बागी विधायकों ने एकजुट होकर पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस ने इस बागी गुट को मान्यता देते हुए ऋतब्रत बनर्जी को 'नेता प्रतिपक्ष' घोषित कर दिया है और उन्हें चैंबर की चाबियां भी सौंप दी हैं। ऋतब्रत ने दावा किया है कि उनके साथ विधायकों की संख्या अब 64 तक पहुंच चुकी है। ममता बनर्जी के पास अब महज 22 विधायक ही रह गए हैं।
राज्यसभा की स्थिति: राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसदों में से 2 (सुखेंदु शेखर और सुष्मिता देव) के इस्तीफे के बाद अब केवल 11 सांसद बचे हैं।
'अब मैं आजाद हूं' – इस्तीफे के बाद सुष्मिता देव
पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद असम की कद्दावर नेता सुष्मिता देव ने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से औपचारिक मुलाकात की, जिससे उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा राज्यसभा की सीट मुझे पार्टी ने दी थी, इसलिए जब मैं पार्टी छोड़ रही हूं तो नैतिक रूप से मुझे यह पद भी छोड़ देना चाहिए था। मेरे कुछ व्यक्तिगत और राजनीतिक कारण हैं। राजनीति में हर बात का खुलासा तुरंत नहीं किया जाता। फिलहाल मैं आजाद हूं, असम जा रही हूं और कुछ दिन परिवार के साथ रिलैक्स करूंगी।
दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सियासी बैठकें
इस अभूतपूर्व संकट से अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाने के लिए टीएमसी का शीर्ष नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सियासी बैठकें हो रही हैं।
अभिषेक-राहुल की मुलाकात: टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच इस संकट और विपक्षी एकजुटता को बनाए रखने पर गहन चर्चा हुई।
सोनिया गांधी से मिलीं ममता: इससे एक दिन पहले खुद ममता बनर्जी ने दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास '10 जनपथ' जाकर उनसे करीब एक घंटे तक मुलाकात की थी, जिसके बाद वे कोलकाता लौट गईं।
विपक्षी गठबंधन पर असर: 8 जून को ही दिल्ली में विपक्षी 'INDIA' गठबंधन की बैठक हुई थी जिसमें ममता और अभिषेक शामिल हुए थे। लेकिन अपनी ही पार्टी में मची इस बड़ी बगावत के बाद राष्ट्रीय राजनीति और 'INDIA' ब्लॉक के भीतर ममता बनर्जी की सौदेबाजी की ताकत को बड़ा झटका लगा है।
कानूनी पेंच और असली टीएमसी की लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस टूट के बाद आने वाले दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरे होने वाले हैं। बागी गुटों के पास दो-तिहाई से अधिक संख्या होने के कारण उन पर दल-बदल कानून लागू होना मुश्किल दिख रहा है। ऐसे में अब असली लड़ाई सिर्फ संख्या बल की नहीं, बल्कि टीएमसी के नाम, चुनाव चिह्न, पार्टी संगठन और राजनीतिक विरासत पर अधिकार जमाने की होगी। ममता गुट और बागी गुट के बीच अब अदालत से लेकर चुनाव आयोग तक एक लंबी कानूनी जंग छिड़ना तय माना जा रहा है। दूसरी तरफ, भ्रष्टाचार के आरोपों और केंद्रीय एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच तृणमूल के सैकड़ों स्थानीय नेता और पार्षद पाला बदलने की तैयारी में हैं।
नेपाल बॉर्डर से टीएमसी नेता जहांगीर खान गिरफ्तार
पार्टी के इस अंदरूनी संकट के बीच टीएमसी को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी एक और झटका लगा है। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने दक्षिण 24 परगना जिले के फालता थाने में दर्ज अवैध वसूली के मामलों में फरार चल रहे टीएमसी नेता जहांगीर खान को नेपाल बॉर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया है। खान के खिलाफ रंगदारी और अवैध वसूली की करीब 7 एफआईआर दर्ज थीं।
