दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में 28 साल के इतिहास की सबसे बड़ी बगावत सामने आई है। विधायकों के बाद अब ममता बनर्जी के सांसदों ने भी बगावत का बिगुल फूंक दिया है। लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इस संबंध में बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र भी भेज दिया है।
टीएमसी की लोकसभा सांसद काकोली घोष ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने दावा किया कि सांसदों ने यह फैसला जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए और आपसी विचार-विमर्श के बाद लिया है। काकोली ने हाल ही में 27 मई को पार्टी से इस्तीफा दिया था, लेकिन वे सांसद पद पर बनी हुई हैं।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच सोमवार दोपहर को टीएमसी के 11 बागी सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी इन नेताओं से मुलाकात करने पहुंचे। बैठक में काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी जैसे कद्दावर लोकसभा सांसद शामिल रहे।
खास बात यह है कि इस बैठक में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद थे, जिन्होंने आज सुबह ही अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी को अलविदा कह दिया। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद अब इस सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन गई है। सुखेंदु शेखर ने ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को अराजक बताते हुए कहा कि पार्टी में फैसले मनमाने ढंग से लिए जा रहे थे, जिससे कई नेता नाराज हैं।
इस बगावत की पटकथा रविवार देर रात दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर हुई टीएमसी सांसदों की अनौपचारिक बैठक में ही लिख दी गई थी, जहां मौजूदा संसदीय नेतृत्व को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया था। इस बैठक की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस बीच, बंगाल विधानसभा में टीएमसी के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी सुखेंदु शेखर के बयानों का समर्थन किया है।
गौरतलब है कि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इससे पहले 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायकों ने भी ममता बनर्जी से नाता तोड़कर एक अलग गुट बना लिया था, जिसने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस ने ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दे दी है, हालांकि टीएमसी ने स्पीकर के इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सांसदों की इस ताजा बगावत ने पश्चिम बंगाल और केंद्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं।
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