Jabalpur News: हाईकोर्ट के निर्देश पर अब नगर निगम संभालेगा जबलपुर के सभी ट्रैफिक सिग्नल, अतिक्रमण हटाने के आदेश

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जबलपुर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और लंबे समय से बंद पड़े ट्रैफिक सिग्नलों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन और रखरखाव अब जबलपुर नगर निगम के अधीन होगा। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था में बाधा बनने वाले अतिक्रमणों को तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

शुक्रवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत संयुक्त बैठक के मिनिट्स का अवलोकन किया। इसके बाद अदालत ने कहा कि शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और जहां कहीं अतिक्रमण या अन्य अवरोध ट्रैफिक को प्रभावित कर रहे हों, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए।

कोर्ट को बताया गया कि 27 जुलाई 2026 को कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी जाएगी। इसके बदले ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड प्रत्येक ट्रैफिक सिग्नल के रखरखाव के लिए नगर निगम को प्रतिवर्ष 1.50 लाख रुपये उपलब्ध कराएंगे। नगर निगम इस व्यवस्था के तहत ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार करेगा।

यह मामला नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे और समाजसेवी रजत भार्गव द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा था। याचिका में कहा गया था कि शहर के कई ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से बंद हैं, जिससे जाम की समस्या बढ़ रही है और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत को बताया कि ट्रैफिक सिग्नल चालू रहने के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के ई-चालान जारी होते थे, जिससे सरकार को हर महीने लगभग पांच लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। सिग्नल बंद होने से न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया कि ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन तीन अलग-अलग एजेंसियों के पास होने के कारण समन्वय की कमी बनी हुई थी। वर्तमान में कुछ सिग्नल स्मार्ट सिटी, कुछ नगर निगम और कुछ मध्यप्रदेश पुलिस के नियंत्रण में थे। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सभी सिग्नलों का संचालन एक ही एजेंसी यानी नगर निगम के अधीन रहेगा।

मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

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