दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। ग्वारीघाट में शुक्रवार को नर्मदा नदी में पेट्रोलिंग के दौरान होमगार्ड जवानों से भरी मोटरबोट अचानक डूब गई। बताया जा रहा है कि बरगी बांध के गेट खुलने के बाद नर्मदा घाटों पर जारी अलर्ट के मद्देनजर होमगार्ड की टीम मोटरबोट से पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान नदी के तेज बहाव के बीच बोट का इंजन खराब हो गया और उसमें पानी भरने लगा। कुछ ही देर में मोटरबोट नदी में डूब गई।
हादसे के दौरान बोट में सवार जवानों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कुछ जवानों ने तैरकर नदी से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, जबकि मौके पर मौजूद स्थानीय नाविकों ने भी कई जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी जवान की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है।
4 जवानों की क्षमता, सवार थे करीब 16प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस मोटरबोट से पेट्रोलिंग की जा रही थी, उसकी क्षमता करीब 4 लोगों की थी, जबकि उसमें लगभग 16 जवान सवार थे। हादसे के समय मोटरबोट भानु नामक जवान चला रहा था। क्षमता से करीब दोगुने जवानों के सवार होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि पेट्रोलिंग के दौरान मोटरबोट का इंजन अचानक खराब हो गया। इसके बाद बोट में पानी भरना शुरू हुआ। तेज बहाव के बीच जवानों ने किसी तरह बोट से बाहर निकलने की कोशिश की। इसी दौरान कुछ जवान तैरकर किनारे पहुंचे, जबकि स्थानीय नाविकों ने भी बचाव कार्य करते हुए जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला।
क्षमता से अधिक जवानों के बैठने की होगी जांच
मोटरबोट में निर्धारित क्षमता से अधिक जवानों के सवार होने की बात सामने आने के बाद होमगार्ड विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पेट्रोलिंग के दौरान बोट में क्षमता से अधिक जवान क्यों सवार थे और नदी में उतरते समय सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए थे या नहीं।
पुलिस और होमगार्ड अधिकारियों ने ली जानकारी
घटना की सूचना मिलते ही ग्वारीघाट थाना पुलिस और होमगार्ड विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लेकर जवानों से घटना की जानकारी ली। प्रारंभिक जांच में इंजन में खराबी आने के बाद बोट में पानी भरने की बात सामने आई है। फिलहाल पुलिस और होमगार्ड विभाग द्वारा हादसे के कारणों तथा सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
हादसे में सभी जवानों के सुरक्षित बचने से अधिकारियों ने राहत की सांस ली, लेकिन क्षमता से दोगुने जवानों को मोटरबोट में बैठाए जाने का मामला अब जांच का अहम बिंदु बन गया है।
