Jabalpur News: राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और राजेश ठाकुर उर्फ भैया को मिली बड़ी राहत, जबलपुर कलेक्टर का NSA आदेश रद्द

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी निरोध आदेश को रद्द करते हुए पुलिस से लेकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पाया कि पुलिस रिकॉर्ड में कई मामलों की स्थिति गलत तरीके से प्रस्तुत की गई थी और संबंधित अधिकारियों ने रिकॉर्ड की पर्याप्त जांच किए बिना रिपोर्ट को आगे बढ़ाया। हाईकोर्ट ने इसे “नॉन-एप्लीकेशन ऑफ माइंड” यानी विवेक का इस्तेमाल नहीं करने का मामला माना।

मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अविनंद्र कुमार सिंह की डिविजन बेंच में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अभिषेक सिंह ने पक्ष रखा।

पुलिस रिकॉर्ड में मिली गंभीर गड़बड़ियां

मामला राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और राजेश ठाकुर उर्फ भैया से जुड़ा है। दोनों के खिलाफ जबलपुर कलेक्टर ने 6 जनवरी 2026 को NSA के तहत निरोध आदेश जारी किया था। पुलिस ने उनके खिलाफ 20 आपराधिक मामलों और दो प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों का हवाला दिया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में संबंधित मामलों के न्यायालयीन फैसले पेश किए गए। रिकॉर्ड की जांच के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि 14 मामलों को लंबित बताया गया था, जबकि इनमें से 11 मामलों का पहले ही निपटारा हो चुका था और आरोपियों को बरी किया जा चुका था। कुछ मामलों में तो 2004 से 2015 के बीच ही फैसले हो चुके थे।

कोर्ट ने माना कि पुलिस रिपोर्ट में वास्तविक न्यायालयीन स्थिति से अलग तथ्य प्रस्तुत किए गए और यही जानकारी आगे अधिकारियों के सामने रखी गई।

एक ही दिन में पुलिस से कलेक्टर तक पहुंची फाइल

हाईकोर्ट ने रिपोर्ट और पत्राचार के क्रम पर भी सवाल उठाए। कोर्ट के अनुसार CSP गोहलपुर ने 6 जनवरी को 20 मामलों और दो प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों से संबंधित रिपोर्ट तैयार की। यह रिपोर्ट उसी दिन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के माध्यम से एसपी तक पहुंची और एसपी ने भी उसी दिन कलेक्टर को भेज दी।

इसके बाद कलेक्टर ने भी 6 जनवरी को ही NSA का निरोध आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इतनी तेजी से पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ने के दौरान रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों की पर्याप्त जांच नहीं की गई।

थाना प्रभारी से लेकर एसपी और कलेक्टर तक नहीं हुई जांच

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि थाना स्तर से लेकर अतिरिक्त एसपी और एसपी तक किसी अधिकारी ने रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों की पुष्टि नहीं की। इसके बाद कलेक्टर ने भी उपलब्ध सामग्री का स्वतंत्र और विवेकपूर्ण मूल्यांकन किए बिना आदेश जारी कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि CCTNS के माध्यम से संबंधित मामलों की वास्तविक स्थिति आसानी से जांची जा सकती थी। इसके लिए कोई विशेष प्रयास आवश्यक नहीं था। इसके बावजूद सही रिकॉर्ड सक्षम अधिकारी के सामने नहीं रखा गया।

बम फेंकने की घटना के बाद लगाया गया था NSA

पुलिस के अनुसार 4 जनवरी 2026 को घमापुर थाना क्षेत्र में एक शिकायतकर्ता के घर पर देशी बम फेंका गया था। पुलिस ने इसे इलाके में भय और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की घटना बताते हुए NSA की कार्रवाई का आधार बनाया था।

इसी आधार पर दोनों के खिलाफ तीन महीने का निरोध आदेश जारी किया गया था। बाद में अप्रैल और 6 जुलाई को इसकी अवधि तीन-तीन महीने के लिए बढ़ाई गई थी।

CCTV फुटेज का मामला भी कोर्ट के सामने आया

सुनवाई के दौरान 4 जनवरी की घटना से संबंधित CCTV फुटेज का मुद्दा भी सामने आया। याचिकाकर्ताओं की ओर से फुटेज में हेरफेर का आरोप लगाया गया। कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में एसपी जबलपुर पहले ही विभागीय स्तर पर कार्रवाई कर चुके हैं।

एसपी ने 24 जून 2026 को सब इंस्पेक्टर दिनेश गौतम को इस मामले में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस पूरी सामग्री को NSA आदेश की वैधता के संदर्भ में देखा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Amina Begum बनाम State of Telangana फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रिवेंटिव डिटेंशन यानी निवारक निरोध एक असाधारण शक्ति है। इसका इस्तेमाल करते समय सक्षम अधिकारी को उपलब्ध सामग्री का उचित और स्वतंत्र मूल्यांकन करना जरूरी है।

कोर्ट ने माना कि इस मामले में गलत तथ्य अधिकारियों के सामने रखे गए और उन्हें बिना पर्याप्त जांच के आगे बढ़ाया गया। ऐसे में NSA आदेश जारी करने की प्रक्रिया में आवश्यक विवेक का इस्तेमाल नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने पाया कि पुलिस रिकॉर्ड में बताई गई स्थिति वास्तविक न्यायालयीन रिकॉर्ड से अलग थी। 14 मामलों को लंबित बताया गया, जबकि 11 मामले पहले ही समाप्त हो चुके थे। सही तथ्य सक्षम अधिकारी के सामने नहीं रखे गए।

इसे “नॉन-एप्लीकेशन ऑफ माइंड” मानते हुए हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को जारी NSA निरोध आदेश को रद्द कर दिया। दोनों याचिकाओं को मंजूर करते हुए कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया।

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