दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। भाजपा विधायक संजय पाठक परिवार से जुड़ी बताई जाने वाली आनंद माइनिंग को जबलपुर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। सिहोरा तहसील की टिकरिया और प्रतापपुर लौह अयस्क खदानों में कथित अधिक खनन से जुड़ी कार्रवाई को चुनौती देने वाली कंपनी की रिट याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हालांकि, कोर्ट ने कंपनी पर ₹443.04 करोड़ की अंतिम देनदारी तय नहीं की है। मामले में अब जबलपुर कलेक्टर को कंपनी का पक्ष सुनकर अंतिम आदेश पारित करना है।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने मामले की सुनवाई की थी। कोर्ट का आदेश 8 सितंबर को पारित हुआ, जो 16 सितंबर को सामने आया।
सिहोरा की दो खदानों से जुड़ा मामला
पूरा विवाद सिहोरा तहसील स्थित आनंद माइनिंग की टिकरिया और प्रतापपुर लौह अयस्क खदानों से संबंधित है। कंपनी के पास टिकरिया खदान का खनन पट्टा वर्ष 1987 से 2037 तक और प्रतापपुर खदान का पट्टा वर्ष 1978 से 2028 तक बताया गया है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2004 से 2017 के बीच हुए खनन की जांच कराई थी। इसके लिए 23 अप्रैल 2025 को जांच समिति गठित की गई। समिति की रिपोर्ट में निर्धारित सीमा से अधिक खनन किए जाने का मामला सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू हुई।
दोनों खदानों पर ₹234.50 करोड़ से ज्यादा की मांग
जांच के आधार पर कलेक्टर की ओर से कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज रकम के मुताबिक टिकरिया खदान के लिए करीब ₹113.81 करोड़ और प्रतापपुर खदान के लिए करीब ₹120.69 करोड़ की वसूली प्रस्तावित की गई है। दोनों रकम मिलाकर यह राशि ₹234.50 करोड़ से अधिक है।
कंपनी ने इन कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए जांच प्रक्रिया और समिति के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए थे।
जांच रिपोर्ट में ₹443.04 करोड़ का उल्लेख
मामले में जांच समिति की रिपोर्ट में ₹443.04 करोड़ जमा कराने का भी उल्लेख है। इसके साथ जीएसटी की राशि जमा कराने की बात कही गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट में उल्लेखित यह राशि अपने आप में अंतिम वसूली या जुर्माने का आदेश नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि कंपनी की वास्तविक देनदारी अभी कलेक्टर द्वारा निर्धारित की जानी है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि आनंद माइनिंग पर ₹443 करोड़ की अंतिम वसूली तय हो चुकी है।
कंपनी ने जांच प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल
आनंद माइनिंग की ओर से जांच समिति के गठन, उसके अधिकार और जांच रिपोर्ट से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने सहित कई आपत्तियां उठाई गई थीं। कंपनी ने अपने खनन पट्टों और वैध खनन का हवाला देते हुए पूरी कार्रवाई निरस्त करने की मांग की थी।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामला अभी कलेक्टर के समक्ष लंबित है और अंतिम देनदारी निर्धारित नहीं हुई है।
कंपनी को सुनवाई के कई अवसर मिले
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कंपनी को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर दिए गए थे। आदेश के अनुसार एक मामले में कंपनी को आठ और दूसरे मामले में नौ अवसर दिए गए। कार्रवाई करीब छह महीने तक चलने का भी उल्लेख है।
कोर्ट ने इसी आधार पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन संबंधी दलील को स्वीकार नहीं किया।
चार महीने में अंतिम फैसला अपेक्षित
हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को मामले की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर को कंपनी की आपत्तियों, जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने के साथ कंपनी को प्रभावी सुनवाई का अवसर देना होगा। इसके बाद कारण सहित अंतिम आदेश पारित किया जाना है।
कोर्ट ने प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के बाद करीब चार महीने के भीतर निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।
संजय पाठक मामले में पक्षकार नहीं
आनंद माइनिंग का नाम भाजपा विधायक संजय पाठक परिवार से जुड़ा बताया जाता रहा है। कंपनी की वेबसाइट पर नर्मदा पाठक और यश पाठक को पार्टनर बताया गया है। संजय पाठक विजय राघवगढ़ से भाजपा विधायक हैं।
हालांकि मौजूदा हाईकोर्ट मामले में संजय पाठक पक्षकार नहीं हैं और कोर्ट के आदेश में उनके खिलाफ कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया है।
अब कलेक्टर के फैसले पर नजर
हाईकोर्ट द्वारा रिट याचिका खारिज किए जाने के बाद मामले की अगली अहम कड़ी जबलपुर कलेक्टर के समक्ष होने वाली सुनवाई और अंतिम आदेश है। जांच रिपोर्ट में उल्लेखित ₹443.04 करोड़ की राशि, नोटिस में प्रस्तावित वसूली और कंपनी की आपत्तियों पर कलेक्टर को रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लेना होगा।
इसलिए फिलहाल ₹443.04 करोड़ को अंतिम जुर्माना या वसूली मानना सही नहीं होगा। वास्तविक देनदारी कितनी तय होती है, यह कलेक्टर के अंतिम आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
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