MP News: उज्जैन में महामंडलेश्वर के आश्रम पर चला बुलडोजर, चार मंजिला भवन जमींदोज; सिंहस्थ 2028 के लिए कार्रवाई तेज

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार जारी है। शुक्रवार सुबह नगर निगम की टीम ने जूना अखाड़े से जुड़े हरियाणा सेवा आश्रम में बने चार मंजिला होटलनुमा भवन को बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। यह आश्रम महामंडलेश्वर ज्योतिगिरी जी महाराज का बताया जा रहा है। करीब 8 हजार वर्गफीट में बने इस भवन को तोड़ने के लिए चार पोकलेन मशीनों और एक जेसीबी की मदद ली गई।

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, सिंहस्थ क्षेत्र में बने इस भवन को हटाने के लिए आश्रम प्रबंधन को दो बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। भवन का निर्माण करीब डेढ़ साल से चल रहा था। कार्रवाई के दौरान नई इमारत को पूरी तरह तोड़ दिया गया, जबकि आश्रम के पुराने हिस्से को सुरक्षित रखा गया। भवन के दूसरी तरफ लगा वॉटर सॉफ्टनर भी हटाया गया।

हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रहा अतिक्रमण हटाने का अभियान

नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने बताया कि सिंहस्थ भूमि पर अवैध निर्माण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। सुनवाई के बाद अदालत ने नगर निगम को अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से निगम की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। इससे पहले भी सिंहस्थ क्षेत्र में स्थित आश्रमों और अन्य निर्माणों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नदी के 100 से 200 मीटर के दायरे में होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों का निर्माण किया गया है। इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज नदी में मिलने के कारण जल प्रदूषण बढ़ रहा है।

मामले की सुनवाई के बाद 5 मई को हाईकोर्ट ने नगर निगम को 15 जून तक अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान तेज किया गया।

मुख्यमंत्री के पैतृक मकान से लेकर धार्मिक स्थलों तक कार्रवाई

सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और आरक्षित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कई स्थानों पर कार्रवाई हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान का एक हिस्सा भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण हटाया जा चुका है। इसके अलावा शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को भी हटाया गया था।

सितंबर 2026 में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध हुआ था और पथराव की घटना सामने आई थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली थी। बाद में मस्जिद प्रबंधन से जुड़े लोगों ने प्रभावित हिस्से को हटाने का काम खुद आगे बढ़कर किया। कार्रवाई में गुंबद और मीनार के कुछ हिस्से भी प्रभावित हुए थे।

इसी तरह खड़े हनुमान मंदिर के बाहरी ढांचे को भी हटाया गया था, जबकि प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया। मदीना कॉलोनी और बेगम बाग क्षेत्र में भी मकान, गोदाम और अन्य निर्माणों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

माधवानंद आश्रम और शंकराचार्य मठ पर भी चला बुलडोजर

हरियाणा सेवा आश्रम से पहले लाल पुल क्षेत्र में सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर बन रहे माधवानंद आश्रम की दो मंजिला इमारत को भी ढहाया गया था। करीब 10 हजार वर्गफीट में बन रही इस इमारत को तोड़ने के लिए दो पोकलेन मशीनों और चार जेसीबी की मदद ली गई थी।

वहीं, 25 फरवरी 2026 को सिंहस्थ क्षेत्र में शंकराचार्य मठ और धर्मशालाओं समेत पांच संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी। लोहे के पुल के पास नरसिंह घाट जाने वाले रास्ते पर कर्कराज पार्किंग के समीप पुण्यानंद गिरि महाराज के आश्रम की तीन मंजिला इमारत भी कार्रवाई की जद में आई थी। करीब 15 हजार वर्गफीट में बनी इस इमारत में एसी और बिना एसी वाले कुल 54 कमरे बताए गए थे। एक दिन चली कार्रवाई में भवन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा तोड़ दिया गया था।

नगर निगम का कहना है कि सिंहस्थ 2028 के आयोजन को ध्यान में रखते हुए आरक्षित भूमि पर बिना अनुमति किए गए निर्माणों और अतिक्रमणों को हटाया जा रहा है। 

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