दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के चंदे, निर्माण और मंदिर में चढ़ावे को लेकर BJP, RSS और VHP पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के चंदे का पैसा BJP-RSS के दफ्तर बनाने और चुनावी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। साथ ही मंदिर में चढ़ाए गए कैश, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषणों में 200 से 300 करोड़ रुपए तक की हेराफेरी होने का आरोप लगाया।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि RSS और विनायक दामोदर सावरकर ने हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म की मूल भावना को बदल दिया। उनके मुताबिक सनातन का आधार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और सभी के कल्याण की भावना है।
20 अक्टूबर से शुरू होगी 1000 किमी पदयात्रा
दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ शुरू करेंगे। यात्रा उज्जैन से शुरू होकर ओरछा होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। अयोध्या में रामलला मंदिर के दर्शन के साथ यात्रा का समापन होगा।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा धर्म के नाम पर धन कमाने और आस्था को राजनीतिक हथियार बनाने के खिलाफ है। उन्होंने इसे ‘शिवधाम से रामधाम’ की यात्रा बताया।
80 साल की उम्र में यात्रा को लेकर बोले- उम्र कोई बात नहीं
80 वर्ष की उम्र में इतनी लंबी पदयात्रा करने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उम्र कोई बाधा नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि वे खुद को 50 साल का महसूस करते हैं तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे पर लगाए आरोप
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी हुई और निर्माण कार्य में भी अनियमितताएं हुईं। उन्होंने मंदिर में आने वाले चढ़ावे में भी हेराफेरी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज में चोरी की घटनाएं रिकॉर्ड हुई थीं और कथित तौर पर कई महीनों की फुटेज डिलीट की गई। उनके मुताबिक कैश और सोने-चांदी की चोरी का आंकड़ा 200 से 300 करोड़ रुपए तक हो सकता है।
उन्होंने मंदिर निर्माण के ठेकों, कमीशन और मंदिर के आसपास जमीन खरीद में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए। साथ ही 1989 के रामशिला पूजन अभियान में जुटाए गए धन और चांदी की ईंटों का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।
गांधी की विचारधारा को बताया सनातन की भावना
दिग्विजय सिंह ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी सनातन धर्म और भारतीय परंपराओं का सम्मान करते थे। उनके मुताबिक ‘रघुपति राघव राजा राम, सबको सन्मति दे भगवान, ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम’ जैसी भावना ही सनातन की मूल भावना है।
उन्होंने कहा कि धर्म का उद्देश्य इंसान को भीतर से बदलना है। राम के नाम पर राजनीति, भ्रष्टाचार, हिंसा और अन्याय को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी यात्रा में हर वर्ग, संप्रदाय और विचारधारा के लोग शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक यात्रा नहीं बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य धर्म के नाम पर धन कमाने और आस्था को राजनीतिक हथियार बनाने के खिलाफ आवाज उठाना है।
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