Jabalpur News: बुजुर्गों के सम्मान से समझौता नहीं! भाजपा पार्षद को ससुर का मकान खाली करने का निर्देश, करोड़पति बेटे को भी बेदखल करने का आदेश


दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर।
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम के तहत कलेक्टर न्यायालय ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। भाजपा पार्षद श्रीमती रेनू कोरी को उनके 87 वर्षीय बुजुर्ग ससुर के मकान से कब्जा खाली करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान व संपत्ति संरक्षण को सर्वोपरि मानते हुए यह फैसला दिया है।

गोहलपुर थाना क्षेत्र के त्रिमूर्ति नगर (डॉ. राममनोहर लोहिया वार्ड) निवासी 87 वर्षीय बुजुर्ग रूपलाल कोरी (सेवानिवृत्त कर्मचारी) ने वर्ष 1986 में अपनी जीवनभर की बचत से 2400 वर्गफुट का भूखंड खरीदकर मकान बनवाया था। रूपलाल कोरी का आरोप था कि उनके दिवंगत पुत्र की पत्नी और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री/पार्षद रेनू कोरी ने मकान के कमरों व दुकान पर अवैध रूप से कब्जा जमा रखा था। जर्जर हो चुके मकान की मरम्मत कराने पर भी वे अड़ंगा लगाती थीं, जिससे इस उम्र में बुजुर्ग ससुर को भीषण मानसिक व व्यावहारिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी।

कलेक्टर कोर्ट ने खारिज कीं तमाम दलीलें


मामले में पूर्व में एसडीएम अधारताल ने इसे पारिवारिक विवाद बताकर आवेदन निरस्त कर दिया था, जिसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह मामला कलेक्टर कोर्ट पहुँचा। सुनवाई के दौरान भाजपा पार्षद रेनू कोरी ने सिविल कोर्ट में मामला लंबित होने और संपत्ति के पुनर्निर्माण में पति का पैसा लगने की दलीलें दीं।

लेकिन कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने एसडीएम अधारताल के आदेश को निरस्त करते हुए दोटूक कहा कि वरिष्ठ नागरिक को अपनी स्वअर्जित संपत्ति में जीवन के अंतिम पड़ाव पर शांतिपूर्ण और सम्मानजनक ढंग से रहने का पूरा वैधानिक अधिकार है। पार्षद के पास वैकल्पिक आवास उपलब्ध होने को ध्यान में रखते हुए, कलेक्टर ने उन्हें एक माह के भीतर मकान पूरी तरह खाली कर ससुर को सौंपने का अल्टीमेटम दिया है। तहसीलदार अधारताल व थाना प्रभारी गोहलपुर को आदेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

करोड़पति होने के बावजूद पिता को प्रताड़ित करने वाले बेटे को भी बेदखल करने का आदेश


इसी अधिनियम के तहत एक अन्य मामले में, कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने बेलबाग निवासी 70 वर्षीय पिता बसंत कुमार रामचंदानी की अपील स्वीकार करते हुए उनके 50 वर्षीय पुत्र सुनील रामचंदानी को एक माह में मकान व दुकान खाली करने का आदेश दिया।

करोड़पति होने और खुद के आलीशान बंगले व 80 हजार रुपये किराए की आय होने के बावजूद पुत्र अपने वयोवृद्ध पिता को प्रताड़ित कर उनके स्वअर्जित मकान पर कब्जा जमाए बैठा था। कलेक्टर ने एसडीएम रांझी का पुराना आदेश निरस्त कर बेटे को बेदखल करने के निर्देश दिए हैं।

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