लेटरल एंट्री पर राहुल गांधी का निशाना: "मोदी सरकार संविधान पर कर रही है हमला"

दैनिक सांध्य बन्धु नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों में संयुक्त निदेशकों, सचिवों और उप सचिवों के प्रमुख पदों पर लेटरल एंट्री के जरिए 45 विशेषज्ञों की नियुक्ति की कड़ी आलोचना की है। राहुल गांधी ने इस कदम को संविधान पर हमला करार देते हुए कहा कि महत्वपूर्ण पदों पर लेटरल एंट्री के ज़रिए भर्ती कर एससी, एसटी, ओबीसी से आरक्षण छीना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के ज़रिए भर्ती कर रहे हैं और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को दरकिनार कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, "पीएम मोदी संविधान पर हमला कर रहे हैं। मैंने हमेशा कहा है कि टॉप ब्यूरोक्रेसी समेत देश के सभी शीर्ष पदों पर वंचितों का प्रतिनिधित्व नहीं है, और इसे सुधारने के बजाय लेटरल एंट्री द्वारा उन्हें शीर्ष पदों से दूर किया जा रहा है।"

लेटरल भर्ती का विरोध केवल राहुल गांधी ने ही नहीं, बल्कि आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी किया है। लालू यादव ने कहा है कि मोदी सरकार और उनके सहयोगी बाबा साहेब के संविधान एवं आरक्षण की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वहीं, अखिलेश यादव ने इस फैसले के खिलाफ दो अक्टूबर को प्रदर्शन की चेतावनी दी है। बीएसपी प्रमुख मायावती ने भी इस फैसले को गलत बताते हुए कहा कि यह बीजेपी सरकार की मनमानी है।

लेटरल एंट्री का मुद्दा तब सामने आया जब केंद्र सरकार ने 2018 में ब्यूरोक्रेसी में सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से नियुक्तियों के अलावा सीधे नियुक्तियों (लेटरल एंट्री) के माध्यम से बड़े पदों पर अधिकारियों की भर्ती करने की योजना शुरू की थी। हाल ही में यूपीएससी ने विभिन्न मंत्रालयों में संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के पदों के लिए 45 विशेषज्ञों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है।

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