दैनिक सांध्य बन्धु नई दिल्ली/पेरिस। भारतीय रेसलर विनेश फोगाट को तय कैटेगरी में अधिक वजन होने के कारण पेरिस ओलिंपिक से बाहर होना पड़ा है। 50 किलोग्राम कैटेगरी में खेलने वाली विनेश का वजन 100 ग्राम अधिक पाया गया। इसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। भारतीय ओलिंपिक संघ ने इसकी पुष्टि की है।
रातभर की कोशिशें रहीं नाकाम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विनेश और उनके कोच को मंगलवार रात ही उनके अधिक वजन के बारे में पता चल गया था। इसके बाद विनेश ने पूरी रात जागकर वजन कम करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाईं। उन्होंने अपने बाल और नाखून तक काट दिए थे, फिर भी वजन कम नहीं हो सका। भारतीय दल ने समय देने की मांग की, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया।
स्वास्थ्य बिगड़ा, अस्पताल में भर्ती
ओलिंपिक से बाहर होने के बाद विनेश की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन की अध्यक्ष पीटी उषा से कहा है कि वे विनेश की मदद के तरीके तलाशें और इस मामले में विरोध दर्ज कराएं।
ओलिंपिक फाइनल में पहुंची थीं विनेश
विनेश मंगलवार को तीन मुकाबले जीतकर 50 किलोग्राम रेसलिंग ओलिंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला रेसलर बनी थीं। सेमीफाइनल में उन्होंने क्यूबा की पहलवान गुजमान लोपेज को हराया था। अब विनेश की जगह सेमीफाइनल में उनसे हार चुकीं क्यूबा की पहलवान फाइनल में खेलेंगी।
विनेश की पिछली चुनौतियां
विनेश का यह तीसरा ओलिंपिक था। 2016 के रियो ओलिंपिक में वे चोट की वजह से बाहर हो गई थीं और 2020 के टोक्यो ओलिंपिक में वे क्वार्टर फाइनल में हार गई थीं। पेरिस ओलंपिक में उनका एक मेडल पक्का माना जा रहा था। ओलिंपिक चयन ट्रायल के विवाद के कारण उन्हें 53 किलोग्राम की जगह 50 किलोग्राम कैटेगरी में खेलना पड़ा था।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "विनेश, आप चैंपियंस की चैंपियन हो। आज का झटका दुखद है, लेकिन हम सब आपके साथ हैं। मजबूत होकर वापस आओ।"
आंदोलन और बैन
विनेश भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह के खिलाफ आंदोलन में भी शामिल थीं। टोक्यो ओलिंपिक के बाद उन्हें बैन कर दिया गया था, जिससे वे डिप्रेशन में चली गई थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे ओलिंपिक में जगह बनाई।
विनेश फोगाट का पेरिस ओलिंपिक से बाहर होना एक बड़ा झटका है, लेकिन उनकी जुझारूता और संघर्ष की कहानी प्रेरणादायक है।
