भाजपा संगठन चुनाव: आंतरिक राजनीति की बढ़ती सरगर्मियां

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। आगामी महीने में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक चुनावों को लेकर शहर में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बड़े नेताओं की पूछ-परख बढ़ गई है और संगठन में पद पाने की लालसा रखने वाले नेता अपने आकाओं के दरबार में लगातार हाजिरी लगाते नजर आ रहे हैं। इस बार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सदस्यता अभियान पर खासा जोर दिया है, जिसमें घोषणा की गई थी कि जो नेता जितने अधिक सदस्य बनाएगा, उसे संगठन में उसी अनुपात से स्थान मिलेगा। 

इस घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं में जैसे एक प्रतियोगिता का माहौल बन गया है। कई नेताओं ने कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम आयोजित कर सदस्यता अभियान को बढ़ावा दिया, तो कुछ ने देवी जागरण जैसी धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से अपने समर्थकों और नए सदस्यों को जोड़ने का प्रयास किया। इस बार भाजपा के संगठन चुनाव में पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र  यह कहा जा रहा है कि नगर अध्यक्ष का चुनाव सीधे सदस्यों द्वारा कराया जाएगा, यानी अब अध्यक्ष की नियुक्ति ऊपर से नहीं होगी। इस कदम ने चुनाव को और भी रोचक बना दिया है। 

ऐसे में वर्तमान नगर अध्यक्ष से नाराज कई नेता अब उन्हें हटाने की मुहिम में जुटे हैं। हालांकि, वर्तमान नगर अध्यक्ष ने संगठन में अपनी पकड़ काफी मजबूत बना रखी है। उनकी सक्रियता और राजनीतिक अनुभव का एक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब नवनिर्वाचित सांसद आशीष दुबे द्वारा आयोजित फ्लाईओवर निरीक्षण कार्यक्रम में वे मौजूद थे। इस कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष के साथ महापौर, दो पूर्व मंत्री, और कई पार्षद, वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे, जिससे उनकी पकड़ और राजनीतिक प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, फ्लाईओवर ब्रिज को अपनी उपलब्धि बताने वाले वर्तमान में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी, जिससे पार्टी के अंदर मतभेद और भी उजागर हो गए। 

सदस्यता अभियान को लेकर नेताओं के बीच एक प्रकार की प्रतिस्पर्धा का माहौल बन गया है। कई महिला नेत्रियों ने भी अपने योगदान के आधार पर संगठन में प्रमुख पदों पर दावा ठोक दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने संगठन में काफी सदस्य बनाए हैं और उन्हें नियमों के अनुसार उचित स्थान मिलना चाहिए। इस बात ने भी संगठन चुनाव को और अधिक रोमांचक बना दिया है, क्योंकि महिला नेत्रियों की इस मांग को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा तेज है। 

यदि पार्टी द्वारा महिला नेताओं के दावों को मान्यता दी जाती है, तो यह भाजपा संगठन में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करेगा।संगठन चुनाव में पद पाने के इच्छुक नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उनके द्वारा किए गए योगदान के आधार पर ही पदों का बंटवारा किया जाए। हालांकि, अंदरखाने यह भी चर्चा हो रही है कि यदि यह नियम नहीं चला तो निर्णय पार्टी के आकाओं की सहमति से ही लिया जाएगा। 

राजनेतिक विशेषज्ञों का मानना है की भाजपा के संगठन चुनाव इस बार केवल पदों के लिए होड़ नहीं, बल्कि पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र की परीक्षा भी हैं। नगर अध्यक्ष का चुनाव सदस्यों द्वारा कराने का फैसला, सदस्यता अभियान के जरिए पद का वादा और महिला नेत्रियों के बढ़ते दावे पार्टी की लोकतांत्रिक छवि को नई दिशा देने की ओर इशारा कर रहे हैं। लेकिन यदि संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने अपने करीबी नेताओं को ही पदों पर नियुक्त करने का निर्णय लिया, तो इससे भाजपा के आंतरिक ढांचे में असंतोष उत्पन्न हो सकता है।

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