News Update: विदाई समारोह में पिता की सीख याद कर भावुक हुए CJI चंद्रचूड़, न्याय के क्षेत्र में किए बड़े बदलाव

दैनिक सांध्य बन्धु नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का 8 नवंबर को आखिरी वर्किंग डे था। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में उन्होंने अपने करियर और व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। इस दौरान उन्होंने अपने पिता से जुड़ी एक मार्मिक घटना सुनाई, जिसने उनके जीवन और करियर में गहरा प्रभाव डाला।

CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि उनके पिता ने पुणे में एक छोटा फ्लैट खरीदा था, जो उनके सिद्धांतों की रक्षा का प्रतीक बना। उनके पिता ने कहा था, "अगर कभी तुम्हें लगे कि तुम्हारी नैतिकता या बौद्धिक ईमानदारी से समझौता हो रहा है, तो याद रखना कि तुम्हारे सिर पर एक छत है। अपने उसूलों से कभी समझौता मत करना।"

CJI चंद्रचूड़ के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए, जिनमें आर्टिकल 370, राम जन्मभूमि विवाद, वन रैंक-वन पेंशन, मदरसा केस, सबरीमाला मंदिर विवाद, चुनावी बॉन्ड की वैधता, और CAA-NRC के फैसले शामिल हैं।

CJI चंद्रचूड़ के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तकनीकी तौर पर उन्नत हुआ। ई-फाइलिंग, पेपरलेस सबमिशन, केस लाइव ट्रैकिंग, और डिजिटल स्क्रीन जैसे सुधार लाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी कोर्टरूम से लाइवस्ट्रीमिंग शुरू की, जिससे आम जनता को कोर्ट की कार्यवाही तक सीधी पहुंच मिली।

CJI चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट लाइब्रेरी में ‘लेडी ऑफ जस्टिस’ की मूर्ति को स्थापित कराया। इस पहल का उद्देश्य यह था कि कानून अंधा नहीं, बल्कि न्याय का प्रतीक है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट का नया फ्लैग और चिह्न जारी किया गया।

CJI चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट के ग्रीष्म अवकाश में संशोधन किया। अब इसे आंशिक न्यायालय कार्य दिवस कहा जाएगा। नए नियमों के तहत, सुप्रीम कोर्ट में छुट्टियां घटाकर 95 दिन कर दी गई हैं, जबकि पहले यह संख्या 103 थी।

ब्रिटेन यात्रा के दौरान एक सवाल के बाद, CJI ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच की कुर्सियों की ऊंचाई में सुधार के निर्देश दिए ताकि सभी कुर्सियां एक समान हों और न्यायाधीशों को बेहतर सुविधा मिले।

अटॉर्नी जनरल एआर वेंकटरमणी ने कहा कि CJI चंद्रचूड़ ने निष्पक्षता से न्याय किया और हर केस में धैर्य दिखाया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कपिल सिब्बल ने कहा कि चंद्रचूड़ साहब ने उन समुदायों तक न्याय पहुंचाया, जिन्हें पहले अनसुना और अनदेखा किया गया था। जस्टिस संजीव खन्ना, जो अब 51वें CJI बनेंगे, ने कहा कि उनके काम को आगे बढ़ाना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि CJI चंद्रचूड़ ने कई बदलाव और सुधार किए हैं जो हमेशा याद किए जाएंगे।

CJI डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल अपने आप में एक मिसाल बन गया है, जिसमें न केवल ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं, बल्कि न्यायपालिका में सुधार और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी उठाए गए हैं।

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