उन्होंने कहा कि अगर हम श्री कृष्ण और भोलेनाथ के मंदिरों को नहीं बचा सके, तब काहे के कथावाचक और काहे के सनातनी। हम अपनी भावनाएं बता रहे हैं कि जब तक हमारे मंदिर हमें नहीं मिल जाएंगे, तब तक शांति नहीं मिलेगी। दूसरे धर्म के लोग अगर सौहार्द दिखाना चाहते हैं तब उन्हें खुद कहना चाहिए कि आप अपने मंदिर वापस ले लो। महाकुंभ में अपने मदिरों के मुद्दे को जोर शोर से उठाएंगे।
रामभद्राचार्य ने क्या कहा था?
दरअसल भागवत ने कहा था कि हर जगह मंदिर ढूंढ़ने की इजाजत नहीं दी सकती। इसके अलावा भागवत के बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था कि मैं भागवत के भाषण से पूरी तरह असहमत हूं। मैं मंदिरों पर दिए गयें बयान से बिल्कुल सहमत नहीं हूं...उधर, ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भागवत की आलोचना कर उन पर ‘राजनीतिक सुविधा के अनुसार बयान देने का आरोप लगाकर कहा कि जब उन्हें सत्ता प्राप्त करनी थी, तब वह मंदिर-मंदिर करते थे अब सत्ता मिल गई तब मंदिर नहीं ढूंढ़ने की नसीहत दे रहे हैं।
