भागवत के बयान से नाखुश जगद्गुरु रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद, देवकीनंदन ने कहा, दूसरे मंदिर भी हमें मिलने चाहिए

दैनिक सांध्य बन्धु प्रयागराज। जगद्गुरू रामभद्राचार्य के बाद मशहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। प्रयागराज महाकुंभ में अपने शिविर का भूमिपूजन करने पहुंचे देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भागवत का सम्मान करता हूं, इसलिए कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन हमारे दूसरे मंदिर भी हमें मिलने चाहिए। इस दौरान देवकीनंदन ठाकुर का इशारा मथुरा और काशी सहित दूसरे मंदिरों की ओर था। 

उन्होंने कहा कि अगर हम श्री कृष्ण और भोलेनाथ के मंदिरों को नहीं बचा सके, तब काहे के कथावाचक और काहे के सनातनी। हम अपनी भावनाएं बता रहे हैं कि जब तक हमारे मंदिर हमें नहीं मिल जाएंगे, तब तक शांति नहीं मिलेगी। दूसरे धर्म के लोग अगर सौहार्द दिखाना चाहते हैं तब उन्हें खुद कहना चाहिए कि आप अपने मंदिर वापस ले लो। महाकुंभ में अपने मदिरों के मुद्दे को जोर शोर से उठाएंगे। 

रामभद्राचार्य ने क्या कहा था?

दरअसल भागवत ने कहा था कि हर जगह मंदिर ढूंढ़ने की इजाजत नहीं दी सकती। इसके अलावा भागवत के बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था कि मैं भागवत के भाषण से पूरी तरह असहमत हूं। मैं मंदिरों पर दिए गयें बयान से  बिल्कुल सहमत नहीं हूं...उधर, ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भागवत की आलोचना कर उन पर ‘राजनीतिक सुविधा के अनुसार बयान देने का आरोप लगाकर कहा कि जब उन्हें सत्ता प्राप्त करनी थी, तब वह मंदिर-मंदिर करते थे अब सत्ता मिल गई तब मंदिर नहीं ढूंढ़ने की नसीहत दे रहे हैं।

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