Jabalpur News: खुले में रखी है लाखों क्विंटल धान से प्रशासन और किसान दोनों चिंतित

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर।
पूरे प्रदेश सहित जबलपुर में भी धान की खरीदी चल रही है। धान खरीदी को लेकर आ रही समस्याओं पर भारतीय किसान संघ मुखर है, अभी जहां जिन किसानों की धान बिक चुकी है वो भुगतान के लिये परेशान हैं। जिनकी धान केन्द्र के बाहर तुलाई और परिवहन के इंतेजार में खुले में पड़ी है या खलीहानों में पड़ी है, वो मावठे की बारिश की आशंका से अब किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरे दिखने लगी हैं। मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि सोमवार से पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी और कोहरा छाएगा, 23 से 28 दिसम्बर के बीच संभाग में बारिश भी हो सकती है। ऐसे में लाखों क्विंटल धान के भीगने और खराब होने की संभावना भी बनी हुई है।

भारतीय किसान संघ का कहना है कि वेयर हाउसों को ही खरीदी केन्द्र बनाए जाने से धान खरीदी केन्द्रों के बाहर ही पड़ी है। इस स्थिति में यदि धान का उठाव पर्ची कटने के बाद भी नहीं हो पाया तो किसानों का भुगतान अटक जाएगा। क्योंकि धान का भंडारण वेयरहाउस मेंहोने के बाद ही वेयर हाउस संचालक की जिम्मेदारी तय होती है। यदि पर्ची कटने के बाद भी धान गीली हो जाती है तो वेयर हाउस संचालक गीली धान का भंडारण नहीं करेंगे। तब किसानों को भुगतान में भी दिक्कत आएगी।

किसान का भुगतान अटक जाएगाकिसान स्लाट बुक करने के बाद निर्धारित तिथि पर अपने स्वयं के साधन टेक्टर ट्राली में धान ले जाकर खरीदी केंद्र पर ढेर लगा देता है, उसके बाद नियुक्त सर्वेयर एफएक्यू के अनुसार धान की जांच करता है। यदि धान एफएक्यू के अनुसार है तो केंद्र पर मौजूद पल्लेदार उसकी तुलाई करते है। तुलाई पूरी होने के बाद कम्प्यूटर आपरेटर आनलाईन किसान के रजिस्ट्रेशन नंबर पर धान की तुलाई मात्रा को चढ़ाता है और किसान को उसकी पक्की पर्ची दे दी जाती है। उसके बाद धान का उठाव कर उसे वेयरहाउस में रख टीपी काट किसान को भुगतान किया जाता है। यदि समय पर उठाव नहीं हो पाया तो खुले में पड़ी धान संभावित बारिश से खराब होगी और किसान का भुगतान भी अटक जाएगा।

माल का उठाव धीमी गति से होने और खरीदी केन्द्रों के बाहर माल का भंडारण अत्याधिक मात्रा में होने के कारण साथ ही बारिश की संभावना को देखते हुये, पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग का काम भी अघोषित रूप से बंद हो गया है। ताकी किसान धान लेकर खरीदी केन्द्रों पर न पहुंच सकें। किसानों के मुताबिक अभी तक खरीदी गई धान का मात्रा 40 से 45 प्रतिशत तक ही उठाव हुआ है। 50 से 55 प्रतिशत धान जो अनुमान के तौर पर 4-5 लाख क्विंटल होगी, खुले में पड़ी है। इससे प्रशासन और किसान दोनों की चिंता बढ़ गई है।

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