दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की गुटबाजी में प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। भाजपा नगर अध्यक्ष का पद अब कौन संभालेगा। इस पर छाए धुंधलके के बादल करीब-करीब छट गए है। कुछ अप्रत्याशित उलट फेर नहीं हुआ। शहरी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वालें दो विधायकों अशोक रोहाणी या डॉ. अभिलाष पांडे किसी एक को यह कमान सौंपी जा सकती है। इसके पूर्व भी उमा भारती के मुख्यमंत्रीत्व काल में जबलपुर उत्तर मध्य के तत्कालीन विधायक रहते हुए शरद जैन नगर अध्यक्ष का पद संभाल चुके है। यदि कोई अप्रत्याशित पेंच नहीं फसा तो आज या कल में नए अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी। यदि शहर में इन दो विधायकों में से किसी एक विधायक को पद सौंपा गया तो ग्रामीण अध्यक्ष का पद पिछड़ा वर्ग के एक दावेदार को सौंपा जा सकता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा जबलपुर में पार्टी के अंदर मची घमासान को संभालने के लिये दो विधायकों में से एक को नगर अध्यक्ष बनाने जा रही है। युवा कार्ड चला तो उत्तर मध्य आएगा, नगर अध्यक्ष पद और वरिष्ठ व अनुभव को वरीयता दी गई तो यह पद केन्ट के खाते में जाएगा। जानकारी के अनुसार रायशुमारी के माध्यम से एक राय बनाने आए बंसीलाल गुर्जर 38 नाम लेकर भोपाल पहुंचे। इन नामों पर मंथन के बाद काफी उठा पटक हुई और प्रदेश से यूं तो विधायक डॉ. अभिलाष पांडे का नाम फायनल होकर दिल्ली पहुंच गया, लेकिन दूसरे गुट को अभी भी इस नाम पर आपत्ति है, जबकि प्रदेश संगठन ने अपनी राय व्यक्त कर दी है।
दिल्ली ने जबलपुर में पार्टी के अंदर बन चुके सभी गुटों के नामों को किनारे करते हुए विधायक को ही अध्यक्ष की कमान सौंपने करीब-करीब तैयारी कर ली है जिसके बाद केन्ट और उत्तर मध्य विधायक के बीच नये नगर अध्यक्ष चुने जाने की संभावना प्रबल हो चुकी है। यदि वरिष्ठता को तरजीह दी गई तो केन्ट विधायक नगर भाजपा की कमान संभालते दिखेंगे, यदि युवा होना आधार बना तो उत्तर मध्य विधायक नगर अध्यक्ष पद पर नजर आएंगे। विधायकों में से नगर अध्यक्ष बनाने के लिये तर्क दिया जा रहा है, इससे कई धड़ों में बंटती भाजपा और नहीं बंटेगी। वहीं जबलपुर में जितने वरिष्ठ नेता हैं उतने कहीं नहीं है, ऐसी स्थिति में नए नेतृत्व को उभारने पर बल दिया जा रहा है।
रायशुमारी ने बढ़ाया बिखराव
सबकी एक राय बनाने के लिये रायशुमारी प्रक्रिया अपनाई जाती है। जिसके लिये भाजपा ने चुनाव प्रभारी बनाकर बंसीलाल गुर्जर को जबलपुर भेजा था। लेकिन रायशुमारी में दावेदारों के नाम कम होने की बजाए, तीन गुना बढ़ गये. पहले जहां 6-7 लोग नगर अध्यक्ष की कतार में थे, रायशुमारी के बाद यह संख्या 35-40 तक पहुंच गई।
Tags
jabalpur

