दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। न जी भर के देखा न कुछ बात की, बड़ी आरजू थी मुलाकात की संयुक्त रूप से जबलपुर का साल 2024 कुछ ऐसा ही रहा। न कोई ऐसी उपलब्धि जबलपुर को मिली, जिसके कई साल याद रखे जा सकें। न कोई ऐसा नया बड़ा विकास कार्य शुरू हुआ और न पुराना पूरा हुआ, जिसे कहा जाए कि जबलपुर की कोई बड़ी समस्या हल हो गई। यह राहत की बात रही कि कोई बड़ी आपदा, विपदा जबलपुर से दूर रही, आफत की बात यह रही कि यातायात की समस्या दानव बनकर उभरी और पूरे साल शहर को जकड़े रखा। यातायात समस्या से राहत दिलाने के नाम पर साल के अंत तक टपरा हटाओ कार्रवाई कर प्रशासन ने खानापूरी कर ली। कुल मिलाकर साल 2024 शांत रहा, ऐसी घटनाएं और कार्यक्रम न के बराबर हुए, जिन्हें नए साल में या कई साल तक याद रखा जा सके।
राजनीति
करीब 20 साल तक जबलपुर सांसद रहे राकेश सिंह के बाद अप्रैल में हुए लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक मतों से जीत के आशीष दुबे की पारी का आगाज हुआ। राजनीतिक लिहाज से यह साल पश्चिम विधायक राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे के लिए जहां नये युग का आगाज साबित हुआ, वहीं कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में कई वरिष्ठ और कनिष्ठ नेताओं का करियर खत्म करने वाला साबित हुआ। कांग्रेस खेमे से नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा पूरे साल संघर्ष करते दिखे, वहीं इसी साल नेता प्रतिपक्ष चुने गए अमरीष मिश्रा ने निगम में नई भूमिका में मजबूत भूमिका निभाई। कुल मिलाकर राजनीतिक लिहाज से यह साल जबलपुर के लिए शांत रहा।
शहर विकास
विकास और विकास कार्य की बात की जाए तो, नए दावों और नए वादों में साल बीत गया। कोई बड़ा विकास कार्य जबलपुर में नहीं आया, वहीं सालों से चल रहे कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। 2024 में भी दमोहनाका फ्लाईओवर चालू नहीं हुआ, बेतरतीब चलते इस निर्माण कार्य ने मार्ग में हादसे बढ़ा दिए, वहीं सहायक मार्गों को पूरे साल बाधित रखा।
यातायात
इस साल जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वह थी यातायात। पूरे साल शहर यातायात की समस्या से जूझता रहा, लेकिन जिला प्रशासन, नगर निगम निरीक्षण और आश्वासन के इतर कुछ भी नहीं कर पाए। साल के अंत में जिला प्रशासन की यातायात मुहिम से उम्मीद जागी, लेकिन वह भी ठेले टपरे हटाकर ठंडे बस्ते में चली गई। पहले नवरात्रि और दशहरा के दौरान जाम में खराब हुआ, फिर दीपावली में बाजारों की रौनक को जाम निगल गया। मिलौनीगंज से तीन पत्ती चौक और उसके दोनों तरफ 500 मीटर पूरा साल जाम रहा।
शिक्षा
साल 2023 में जहां मेडिकल कालेज और मेडिकल विश्चविद्यालय नकरात्मक कारणों से चर्चा में रहा, तो साल 2024 में रानी दुर्गावती विश्विद्यालय नकारात्मक कारणों से चर्चा में रहा। पहली बार कुलसचिव बनाम कुलपति अनबन खुली लड़ाई में तब्दील हुई और पूरे साल यहीं चलता रहा। अधिकारियो और कर्मचारियो का एक गुट कुलसचिव खेमे में हो लिया, दूसरा खेमा कुलगुरु के साथ हो लिया। आरोप प्रत्यारोप जांच नोटिस में साल गुजर गया। रादुविवि मे इस साल कोई अकेला दिखा तो वो थे यहां के छात्र जो कुछ अच्छा होने का इंतेजार देखते रह गये।
सफाई
साल का बड़ा हिस्सा सफाई ठेकेदारों की हड़ताल और नई सफाई व्यवस्था लागू करने की प्रैक्टिस में बीत गया। 2024 में गंदगी, बजबजाती नालियां शहर का मुकद्दर बनकर पूरे साल साथ चलीं। 1 अरब से अधिक की सफाई व्यवस्था भ्रष्टाचार और मनमानी की भेंट चढ़ी दिखाई दी।
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