दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। भोलेनाथ की भक्ति में डूबे जबलपुर निवासी एक युवक ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। 25 वर्षीय माछलय कोरी हाथ-पैर में लोहे की जंजीरें डालकर कावड़ यात्रा पर निकल पड़े हैं। उनका संकल्प है कि जब तक भोलेनाथ को नर्मदा जल अर्पित नहीं करेंगे, तब तक शरीर से ये बेड़ियां नहीं हटेंगी।
तीसरे सोमवार को सुबह 7 बजे उन्होंने नर्मदा के गौरीघाट से कैलाशधाम तक की लगभग 35 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा शुरू की। उनके साथ चार दोस्त भी सहयोग कर रहे हैं।
माछलय कोरी ने पीतल के दो कमंडल में नर्मदा जल भरा और लोहे की जंजीरों में हाथ-पैर बांधकर यात्रा की शुरुआत की। राहगीर और श्रद्धालु उन्हें देखकर हैरान रह गए। माछलय कूद-कूदकर यात्रा पूरी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा में 24 से 30 घंटे तक का समय लग सकता है।इस अनोखी भक्ति यात्रा के पीछे सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का उद्देश्य भी छिपा है। माछलय का कहना है देश में जिस तरह नफरत और द्वेष का माहौल बढ़ रहा है, उसे समाप्त करने के लिए सनातन संस्कृति की भावना को फिर से जीवंत करना जरूरी है। यही मेरा मकसद है।
माछलय पहले भी कई बार साइकिल यात्राएं कर चुके हैं, लेकिन इस बार का तरीका अलग और चुनौतीपूर्ण है। बेड़ियों की थकान के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं होता। उनका मानना है कि जब संकल्प पवित्र हो, तो कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है। वे इसे केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति और भाईचारे का संदेश मानते हैं।इस यात्रा ने यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती। माछलय की कावड़ यात्रा न सिर्फ एक धार्मिक संकल्प है, बल्कि आज के समय में सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रेरक उदाहरण भी बन गई है।
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