दैनिक सांध्य बन्धु पटना (एजेंसी)। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद RJD और लालू परिवार के भीतर उबाल तेज हो गया है। लालू प्रसाद यादव की दूसरी बेटी और किडनी डोनर रोहिणी आचार्य ने शनिवार को X पर चौंकाने वाला ऐलान किया—उन्होंने लिखा कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और परिवार से नाता तोड़ रही हैं।
रोहिणी का दावा है कि संजय यादव और रमीज ने उन्हें ऐसा करने को कहा, और वह “सारा दोष अपने ऊपर ले रही हैं।” पोस्ट के तुरंत बाद RJD खेमे में हलचल मच गई।
पार्टी में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे राज्यसभा सांसद और तेजस्वी यादव के रणनीतिक सलाहकार संजय यादव को लेकर लंबे समय से लालू परिवार में असहमति है। तेज प्रताप यादव पहले भी उन्हें ‘जयचंद’ कहकर निशाना बना चुके हैं। अब रोहिणी का खुला हमला यह पुष्टि करता है कि RJD के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर बड़ा टकराव चल रहा है।
RJD के लिए यह विवाद बेहद मुश्किल वक्त में उभरा है। बिहार चुनाव में पार्टी महज 25 सीटों पर सिमट गई, जबकि 2020 में उसके पास 75 सीटें थीं। तेज प्रताप लगभग 50 हजार वोटों से हार गए, जबकि तेजस्वी यादव किसी तरह अपनी सीट बचा पाए।
चुनावी नतीजों के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं में संजय यादव की बढ़ती ताकत को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आ रही है।
18 सितंबर को भी रोहिणी ने एक फेसबुक पोस्ट शेयर कर अप्रत्यक्ष रूप से संजय पर सवाल उठाए थे, जब तेजस्वी की यात्रा बस की फ्रंट सीट पर संजय बैठे दिखे थे। इसके बाद उन्होंने लालू-राबड़ी-तेजस्वी समेत परिवार और पार्टी से जुड़े सभी नामों को अनफॉलो कर दिया था।
इधर तेज प्रताप और संजय के बीच पुराना विवाद फिर उभर आया है। तेज प्रताप पहले भी कई बार आरोप लगाते रहे हैं कि संजय यादव उनका और तेजस्वी का बीच में फासला बढ़ाते हैं। पार्टी से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप की तेजस्वी से दूरी और बढ़ गई।
तेजस्वी की टीम में संजय यादव की पकड़ मजबूत मानी जाती है। तेजस्वी की रणनीति, चुनावी फैसले और सोशल मीडिया की पूरी दिशा संजय तय करते हैं। रमीज, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और जो संगठन के डिजिटल कामकाज को देखते हैं, वह भी इस विवाद के केंद्र में हैं।
वहीं, यादव परिवार की अंदरूनी कलह तब और खुलकर सामने आई जब इसी साल मई में लालू यादव ने तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से बाहर कर दिया था। इसके 35 दिन बाद तेज प्रताप ने निर्दलीय चुनाव लड़कर ‘जन शक्ति मोर्चा’ बनाया, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
अब रोहिणी के कदम से साफ है कि लालू परिवार में आंतरिक खींचतान चरम पर पहुंच गई है। चुनावी हार, नेतृत्व पर सवाल और सलाहकारों की बढ़ती भूमिका ने RJD में बड़ा राजनीतिक भूचाल ला दिया है, जिसके असर से पार्टी की भविष्य की दिशा गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।