जजों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त: कहा— अगर जज सुरक्षित नहीं, तो न्याय व्यवस्था कैसे सुरक्षित मानी जाएगी; अगली सुनवाई 8 जनवरी को

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्यप्रदेश में जजों की सुरक्षा को लेकर लंबित मामले पर जबलपुर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को हुई सुनवाई में कहा कि “अगर जज सुरक्षित नहीं हैं, तो न्याय व्यवस्था कैसे सुरक्षित मानी जाएगी।”

राज्य सरकार ने पेश की रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश की जिसमें बताया गया कि प्रदेश में जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस नीति का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि पिछले समय में जजों के साथ हुई घटनाओं में आरोपियों पर FIR दर्ज कर कार्रवाई की गई है।

हालांकि कोर्ट इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं दिखा और राज्य सरकार से नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी। कोर्ट ने कहा कि पिछली सरकारी रिपोर्ट और कोर्ट की आंतरिक रिपोर्ट में विरोधाभास पाए गए हैं।

अनूपपुर घटना के बाद बढ़ी चिंता

पिछले महीने अनूपपुर में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अमनदीप सिंह छाबड़ा के आवास पर हमला हुआ था। मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एक थाना प्रभारी को निलंबित किया और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

9 साल से लंबित है मामला

जजों की सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा नया नहीं है।

23 जुलाई 2016 को मंदसौर में जिला अदालत के जज राजवर्धन गुप्ता पर हाईवे पर हमला हुआ था।

इससे पहले 2014 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।

कोर्ट परिसर में ऊंची बाउंड्रीवाल, पुलिस चौकी और जजों के आवासीय परिसरों में पुख्ता सुरक्षा जैसे निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार न होने पर कोर्ट ने असंतोष जताया।

अगली सुनवाई 8 जनवरी को 

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत और सटीक सुरक्षा रिपोर्ट मांगी है। डिवीजन बेंच 8 जनवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post