दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के मौके पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे की वजह यूजीसी (UGC) के नए कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को बताया है। अलंकार अग्निहोत्री सोमवार शाम करीब 7:30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट डीएम अविनाश सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। बाहर निकलने के बाद उन्होंने गंभीर आरोप लगाए।
“20 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया” – अलंकार अग्निहोत्री
सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा मुझे डीएम आवास पर 20 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। गालियां दी गईं और कहा गया कि यह पागल हो गया है, इसे यहीं बंद करके रखो। कप्तान को मैंने पहले ही जानकारी दे दी थी। उनके फोन करने पर हमें जाने दिया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि लखनऊ से उन्हें दो घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया गया। उनके आवास पर लगाए गए टेंट को पुलिस ने हटवा दिया।
पोस्टर लेकर किया विरोध प्रदर्शन
इस्तीफे से पहले अलंकार अग्निहोत्री अपने सरकारी आवास के बाहर एक पोस्टर लेकर खड़े नजर आए। पोस्टर पर लिखा था “UGC का काला कानून वापस लो, शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान, #BOYCOTT BJP, #BOYCOTT BRAHMAN MP MLA”
उन्होंने इस मामले में 5 पन्नों का पत्र भी लिखा, जिसमें प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी का जिक्र किया।
“ब्राह्मणों और साधु-संतों की इज्जत से खिलवाड़”
पत्र में उन्होंने लिखा ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ काम कर रही है। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया क्या ब्राह्मणों के नरसंहार की तैयारी है?
अधिकारी मनाने पहुंचे, पर नहीं बदला फैसला
सिटी मजिस्ट्रेट को मनाने के लिए एडीएम समेत तीन अन्य अधिकारी उनके आवास पहुंचे। करीब एक घंटे तक बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
इस बीच सपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कई ब्राह्मण संगठनों के नेता भी उनसे मिलने पहुंचे। आवास के बाहर ब्राह्मण संगठनों ने प्रदर्शन किया।
पहले भी विवादों में रहे हैं अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री वर्ष 2019 में PCS अधिकारी बने थे और उन्हें 15वीं रैंक मिली थी। कार्यालय में बजरंगबली की तस्वीर लगाने को लेकर वे पहले भी चर्चा में आ चुके हैं। उस समय भीम आर्मी ने कलेक्ट्रेट में हंगामा किया था और अफसर से नोकझोंक हुई थी।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने नगर मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा शंकराचार्य का सम्मान सनातन प्रेमियों के हृदय में बहुत गहरा है। उसे आहत करने का क्या परिणाम होगा, इसका अनुमान इस घटना से लगाया जा सकता है। सरकार को इसके नतीजों का आकलन करना चाहिए।
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