दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 25 जनवरी को नर्मदा जन्मोत्सव के अवसर पर जबलपुर पहुंचे स्वामी सदानंद ने कहा कि तीनों शंकराचार्यों ने अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में अपनी पुष्टि दे दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह अधिकार नहीं कि वह शंकराचार्य से उनका प्रमाण पत्र मांगे।
स्वामी सदानंद ने प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि निर्दोष ब्राह्मण बच्चों के साथ जो मारपीट हुई, वह अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि राजा और प्रशासन का कर्तव्य है कि वह प्रजा और धर्म की रक्षा करें, न कि धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करें। स्वामी ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य का शिष्य ही शंकराचार्य होता है और अविमुक्तेश्वरानंद उसी परंपरा के अनुसार शंकराचार्य हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की चूक और समझ की कमी के कारण विवाद बढ़ गया। बच्चों के साथ हिंसा न होनी चाहिए थी; प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन और सुरक्षा बल मौजूद थे। स्वामी ने राजनीतिक हस्तक्षेप को भी गलत बताया और कहा कि अगर प्रशासन समय रहते क्षमा मांगता तो विवाद इतनी बड़ी समस्या नहीं बनता।
स्वामी सदानंद ने यह भी कहा कि ब्राह्मणों के साथ अत्याचार करने वाले कभी भी सुखी नहीं रह सकते और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना हर प्रशासन की जिम्मेदारी है।
Tags
jabalpur
