दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। गुरुवार को CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि नियमों के प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और नियमों को नए सिरे से ड्राफ्ट करने का निर्देश दिया है।
यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर की गई, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ को नोटिफाई किया था, जो 15 जनवरी से देशभर के UGC मान्यता प्राप्त कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लागू कर दिए गए थे। इन नियमों को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों और वर्गों में विरोध देखा जा रहा है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने केंद्र से सवाल किया कि जातिविहीन समाज की दिशा में अब तक क्या हासिल हुआ है और क्या ऐसे प्रावधान हमें उल्टी दिशा में ले जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमों में अस्पष्टता है, जिससे गलत व्याख्या और मनमाना इस्तेमाल संभव है।
UGC के नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव को रोकना बताया गया था। इसके तहत विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का प्रावधान किया गया था, जो इन वर्गों से जुड़े छात्रों की शिकायतों की निगरानी करेंगी। सरकार का दावा है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए किए गए हैं।
हालांकि, सवर्ण वर्ग के छात्रों का आरोप है कि नियमों में जातीय भेदभाव की परिभाषा गैर-समावेशी है और इससे कैंपस में अराजकता का माहौल बनेगा। उनका कहना है कि नए नियमों के तहत सवर्ण छात्रों को ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह देखा जा रहा है, जिससे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।
UGC ने ये नियम हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला और महाराष्ट्र की दलित डॉक्टर पायल तडवी की आत्महत्याओं के बाद बनी परिस्थितियों के मद्देनजर तैयार किए थे। 2019 में उनके परिजनों ने कॉलेजों में जातीय भेदभाव के खिलाफ सख्त नियम बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने UGC को भेदभाव संबंधी शिकायतों का डेटा जुटाने और नए नियम बनाने का निर्देश दिया था। फरवरी 2025 में ड्राफ्ट जारी कर फीडबैक मांगा गया, जिस पर कई आपत्तियां सामने आईं।
संसद की शिक्षा, महिला, बाल और युवा संबंधी मामलों की स्थायी समिति ने ड्राफ्ट की समीक्षा कर दिसंबर 2025 में केंद्र को अपनी सिफारिशें सौंपी थीं। इसके बाद UGC ने संशोधन कर 13 जनवरी 2026 को नए नियम लागू कर दिए।
इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने UGC के नए नियमों का समर्थन करते हुए कहा कि भले ही यह कदम देर से उठाया गया हो, लेकिन यह भेदभाव और उदासीनता से ग्रस्त उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में सकारात्मक है। वहीं भाजपा नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने नियमों का विरोध करते हुए इसे समाज को बांटने वाला बताया और कहा कि एकतरफा कानून पर पुनर्विचार की जरूरत है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद UGC के नए नियमों पर अमल थम गया है और अब केंद्र व आयोग के जवाब और नए ड्राफ्ट पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
