Jabalpur News: जिला अदालत में पुलिसकर्मी बने ‘वकील’, जुर्माने से ज्यादा वसूली करते पकड़े गए; देखे वीडियो

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर।
जबलपुर जिला अदालत में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां चालान मामलों में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर स्वयं अधिवक्ता बनकर पक्षकारों से जुर्माने से अधिक राशि वसूलने का आरोप लगा है। कोर्ट नंबर-2, सीजेएम के समक्ष चल रहे सात समरी ट्रायल मामलों में यह अनियमितता पकड़ी गई। विरोध करने पर पुलिसकर्मियों द्वारा अधिवक्ताओं से अभद्रता करने का आरोप भी सामने आया है।

रंगे हाथ पकड़कर बनाया वीडियो

अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह की शिकायत पहले भी उठ चुकी थी और सबूत के तौर पर वीडियो भी बनाए गए थे। एक बार फिर कोर्ट ड्यूटी पर आए पुलिसकर्मियों को आरोपितों से सीधे संपर्क कर पूरी प्रक्रिया संभालते हुए पकड़ा गया। अधिवक्ताओं ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया है।

निर्धारित जुर्माने से अधिक वसूली का आरोप

आरोप है कि पुलिसकर्मी श्रीकांत गुर्जर (आबकारी) और श्वेता ठाकुर ने पक्षकारों से तय जुर्माने से अधिक राशि ली और फिर स्वयं ऑनलाइन फाइन जमा कर दिया, जो स्थापित न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत माना जा रहा है।

जिन मामलों में गड़बड़ी सामने आई, उनमें अंकित उर्फ बहादुर, सुनीता केवट, महेंद्र बर्मन, छोटे यादव, कान्धिलाल यादव, अनिल बारी और किरन कोल के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इन मामलों में 500 से 1000 रुपये तक जुर्माना निर्धारित था, लेकिन आरोप है कि इससे ज्यादा रकम वसूली गई।

“वकील की जरूरत नहीं” कहकर फंसाने का आरोप


अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिसकर्मी आरोपितों को यह कहकर भरोसा दिलाते थे कि वकील की जरूरत नहीं है और वे खुद ही पूरा मामला निपटा देंगे। लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि कुछ पुलिसकर्मी जमानत और चालान मामलों में खुद ही ‘मध्यस्थ’ बनकर पैसे लेते हैं।

अंदरूनी मिलीभगत की आशंका

इस घटनाक्रम के बाद कोर्ट कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि बिना अंदरूनी सहयोग के इस तरह की प्रक्रिया संभव नहीं है, जिससे न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

पक्षकारों के लिए भी बड़ा जोखिम

कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि जुर्माना गलत तरीके से जमा किया गया या प्रक्रिया अधूरी रही, तो भविष्य में सुनवाई के दौरान संबंधित व्यक्ति को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। अंततः बहस अधिवक्ता को ही करनी होती है, इसलिए ऐसे मामलों में सावधानी बेहद जरूरी है।

दोषी पुलिसकर्मियों और संबंधित कर्मचारियों पर हो कार्रवाई 

अधिवक्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों और संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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