Jabalpur Breaking News: रियायती दर पर मिली सरकारी जमीन पर अस्पताल का निर्माण, ईओडब्ल्यू ने जॉय एजुकेशन सोसायटी के अखिलेश मेबन और तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ दर्ज की FIR

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जॉय एजूकेशन सोसायटी के चेयरमेन अखिलेश मेबन और आधारताल के तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई शासन की रियायती दरों पर शैक्षणिक कार्य के लिए आवंटित भूमि का दुरुपयोग कर शासन को लगभग 3.50 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाने के आरोप में की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता राजकुमार, निवासी जबलपुर द्वारा ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि जॉय एजूकेशन सोसायटी ने नगर निगम अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर शासकीय भूमि का दुरुपयोग किया है। शिकायत की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

जांच में पाया गया कि म.प्र. शासन के आदेश के तहत जॉय एजूकेशन सोसायटी, जिसके चेयरमेन अखिलेश मेबन हैं, को नगर निगम जबलपुर के अंतर्गत प्लॉट नंबर 440, डायवर्सन शीट नंबर 152-सी की 7500 वर्गफुट भूमि शैक्षणिक कार्य के लिए 30 वर्षों की लीज पर रियायती दरों पर आवंटित की गई थी। लीज डीड में स्पष्ट उल्लेख था कि भूमि का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और अन्य उपयोग के लिए नगर निगम से अनापत्ति लेना अनिवार्य होगा।

यह लीज वर्ष 2020 में समाप्त हो गई थी, जिसके बाद 22 अप्रैल 2022 को अखिलेश मेबन के आवेदन पर पुनः 30 वर्षों के लिए लीज बढ़ाई गई। हालांकि, आरोप है कि नगर निगम की अनुमति के बिना उक्त भूमि पर अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है, जो लीज की शर्तों का उल्लंघन है।

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल निर्माण शुरू होने के बाद अखिलेश मेबन ने तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के साथ मिलकर आपराधिक षड़यंत्र रचा और बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए भूमि का मालिकाना हक हासिल कर लिया। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार, शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित इस भूमि की वर्तमान कीमत लगभग 3.50 करोड़ रुपये है।

जांच में यह भी प्रमाणित हुआ कि सोसायटी द्वारा स्कूल संचालन के लिए ली गई इस भूमि पर न तो स्कूल संचालित किया गया और न ही स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्माण किया गया, बल्कि इसके विपरीत अस्पताल का निर्माण कराया गया।

मामले में ईओडब्ल्यू ने अखिलेश मेबन, निवासी विजयनगर जबलपुर एवं हरि सिंह धुर्वे, तत्कालीन तहसीलदार आधारताल जबलपुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5), 61(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7-सी के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।

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