MP News: छतरपुर में प्रदर्शन के दौरान विवाद, भाजपा नेता ने पकड़ी पुलिसकर्मी की कॉलर, वीडियो वायरल

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) छतरपुर। भारतीय जनता पार्टी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी द्वारा एक पुलिसकर्मी की कॉलर पकड़ने का वीडियो सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच चर्चा तेज हो गई है।

छत्रसाल चौराहे पर हुआ प्रदर्शन

जानकारी के अनुसार युवा मोर्चा के कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी के नेतृत्व में छत्रसाल चौराहे पर Rahul Gandhi का पुतला दहन करने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने पुतला छीनने का प्रयास किया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। धक्का-मुक्की के बीच हालात कुछ देर के लिए बिगड़ गए।

वीडियो में दिखी कॉलर पकड़ने की घटना

वायरल वीडियो में नीरज चतुर्वेदी एक पुलिसकर्मी की कॉलर पकड़े नजर आ रहे हैं। घटना के समय मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था। शहर के विभिन्न थानों के टीआई, ट्रैफिक प्रभारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। धक्का-मुक्की के दौरान कुछ पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी प्रभावित हुए।

कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल

वीडियो सामने आने के बाद लोगों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं कि वर्दी पर हाथ डालने के मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। चर्चा यह भी है कि क्या वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है या नहीं।

जिलाध्यक्ष की सफाई

नीरज चतुर्वेदी ने सफाई देते हुए कहा कि वे और उनके कार्यकर्ता पुलिस एवं प्रशासन का सम्मान करते हैं। उनके अनुसार उस समय भीड़ अधिक थी और पुलिस पुतला छीनने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान धक्का-मुक्की में किसी कार्यकर्ता ने गिरने से बचने के लिए सहारा लिया और अनजाने में पुलिसकर्मी की वर्दी या कॉलर हाथ में आ गई।

उन्होंने कहा कि वर्दी का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था और घटना को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

जिले में राजनीतिक प्रदर्शनों, पुतला दहन और आंदोलनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। विभिन्न संगठनों के आंदोलनों में धक्का-मुक्की और टकराव की स्थितियां बनती रही हैं।

बिजावर मामले की भी हो रही चर्चा

इसी संदर्भ में बिजावर में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर हुए प्रदर्शन का भी जिक्र हो रहा है, जहां प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। लोग दोनों घटनाओं की तुलना करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का स्वरूप अलग क्यों दिखाई देता है।

लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं है। कानून सबके लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।

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