दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। स्पेशल आर्म्ड फोर्स (SAF) की छठी बटालियन, रांझी से जुड़ा ट्रैवलिंग अलाउंस (TA) घोटाला लगातार बड़ा होता जा रहा है। पहले करीब 2 करोड़ रुपये का आंका गया यह घोटाला अब बढ़कर लगभग 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। मामले में रांझी थाना पुलिस ने मंगलवार को एक एसएआई, एक मृत आरक्षक समेत कुल 15 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 316(5) और 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। घोटाले का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताए जा रहे एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा फिलहाल फरार है।
2018-19 से चल रहा था फर्जी टीए बिलों का खेल
जांच में सामने आया है कि यह घोटाला वर्ष 2018-19 से लगातार चल रहा था। टीए शाखा में पदस्थ एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा द्वारा फर्जी ट्रैवलिंग अलाउंस बिल तैयार किए जाते थे। इन बिलों में आरक्षकों को जिले से बाहर ड्यूटी पर बताया जाता, जबकि वे वास्तव में जबलपुर में ही तैनात रहते थे।
भुगतान से पहले आने वाला ओटीपी भी सत्यम शर्मा स्वयं प्राप्त करता था और राशि को अपने व सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर देता था। नवंबर 2025 में अनियमितताओं की भनक लगने के बाद मामला उजागर हुआ।
सैलरी से कई गुना ज्यादा TA भुगतान
स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। SAF आरक्षकों का शुरुआती वेतन जहां 23 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह होता है, वहीं कुछ कर्मचारियों के खातों में वेतन से 200 गुना तक अधिक राशि पाई गई।
जांच में सामने आया कि 12 आरक्षकों के खातों में केवल TA बिलों से 10-10 लाख रुपये तक जमा हुए हैं। आरक्षक अभिषेक झारिया के खाते में 582 टीए बिलों के माध्यम से करीब 55 लाख रुपये ट्रांसफर हुए, जबकि 7 वर्षों में उसका कुल वेतन और एरियर करीब 26 लाख रुपये ही था।
इसी तरह नीतेश कुमार पटेल को वेतन और एरियर में जहां 24.67 लाख रुपये मिले, वहीं यात्रा भत्तों के 335 देयकों से 30.51 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
निलंबन के बाद अभिषेक की मृत्यु, मुख्य आरोपी फरार
घोटाले के खुलासे के बाद एलडीसी सत्यम शर्मा और आरक्षक अभिषेक झारिया को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद अभिषेक की मृत्यु की सूचना सामने आई, जबकि सत्यम शर्मा जांच शुरू होते ही फरार हो गया। बाद में उसकी शादी से जुड़ी जानकारी सामने आई, जिसकी सूचना उसने विभाग को नहीं दी थी।
दो स्तरों पर जांच, खाते फ्रीज
मामले की गंभीरता को देखते हुए SAF कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जबकि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत के नेतृत्व में 6 सदस्यीय विशेष जांच टीम बनाई। जांच के दौरान 20 से अधिक आरक्षकों के बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि सत्यम शर्मा राशि का बड़ा हिस्सा नकद में लेता था, ताकि सीधे उसके खाते में लेनदेन न दिखे। फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है और मामले में आगे और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
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