दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जबलपुर में मृत गायों के अंतिम संस्कार को लेकर नगर निगम के खिलाफ गोसेवकों और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम के कर्मचारी अंतिम संस्कार के नाम पर 3,000 रुपए लेने के बावजूद गायों के शवों को नालों में फेंक रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर गोरक्षकों ने नगर निगम कार्यालय के सामने गाय का शव रखकर विरोध जताया।
3,000 रुपए लेने के बाद भी नहीं किया अंतिम संस्कार
बजरंग दल से जुड़े गोरक्षक मनीष शर्मा ने बताया कि सड़क या अन्य स्थानों पर मृत मिली गायों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए गोसेवक अपने निजी खर्च से नगर निगम कर्मचारियों को 3,000 रुपए देते हैं। आरोप है कि कर्मचारी विधिवत अंतिम संस्कार करने के बजाय शवों को नालों में फेंक देते हैं और आपस में पैसे बांट लेते हैं।
मनीष शर्मा का दावा है कि तीन दिन पहले एक गाय को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था, लेकिन बाद में उसका शव नाले में पड़ा मिला। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी उनके पास मौजूद है।
“सैकड़ों शव नालों में पड़े मिले”
भारतीय हिंदू सेना से जुड़े गोरक्षक आदित्य तिवारी ने कहा कि यह कोई एक घटना नहीं है, बल्कि ऐसी सैकड़ों गायें अलग-अलग स्थानों पर नालों में पड़ी मिली हैं। कई जगह शव सड़ते मिले और हड्डियां बिखरी हुई देखी गईं। उनका आरोप है कि इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।
3-4 महीनों से बंद पड़ी गो-एंबुलेंस
गोसेवकों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम की गो-एंबुलेंस पिछले तीन-चार महीनों से बंद पड़ी है। शिकायत करने पर कर्मचारियों द्वारा “गाड़ी खराब है” कहकर टाल दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे घायल और मृत पशुओं को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है।
शव रखकर किया प्रदर्शन
घटना से नाराज गोरक्षकों ने नगर निगम कार्यालय के बाहर गाय का शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने नगर निगम और महापौर के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि दोषी कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए।
जांच के आदेश
नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर संभव अयाची ने कहा कि निगम की ओर से कठुंदा में गाय और अन्य पशुओं के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करोंदा स्थित केंद्र में की गई है। यदि इस तरह के आरोप सामने आए हैं तो उनकी जांच की जाएगी और संबंधित व्यक्तियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मृत गायों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित किया जाए, बंद पड़ी गो-एंबुलेंस को तुरंत चालू किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
3,000 रुपए लेने के बाद भी नहीं किया अंतिम संस्कार
बजरंग दल से जुड़े गोरक्षक मनीष शर्मा ने बताया कि सड़क या अन्य स्थानों पर मृत मिली गायों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए गोसेवक अपने निजी खर्च से नगर निगम कर्मचारियों को 3,000 रुपए देते हैं। आरोप है कि कर्मचारी विधिवत अंतिम संस्कार करने के बजाय शवों को नालों में फेंक देते हैं और आपस में पैसे बांट लेते हैं।
मनीष शर्मा का दावा है कि तीन दिन पहले एक गाय को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था, लेकिन बाद में उसका शव नाले में पड़ा मिला। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी उनके पास मौजूद है।
“सैकड़ों शव नालों में पड़े मिले”
भारतीय हिंदू सेना से जुड़े गोरक्षक आदित्य तिवारी ने कहा कि यह कोई एक घटना नहीं है, बल्कि ऐसी सैकड़ों गायें अलग-अलग स्थानों पर नालों में पड़ी मिली हैं। कई जगह शव सड़ते मिले और हड्डियां बिखरी हुई देखी गईं। उनका आरोप है कि इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।
3-4 महीनों से बंद पड़ी गो-एंबुलेंस
गोसेवकों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम की गो-एंबुलेंस पिछले तीन-चार महीनों से बंद पड़ी है। शिकायत करने पर कर्मचारियों द्वारा “गाड़ी खराब है” कहकर टाल दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे घायल और मृत पशुओं को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है।
शव रखकर किया प्रदर्शन
घटना से नाराज गोरक्षकों ने नगर निगम कार्यालय के बाहर गाय का शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने नगर निगम और महापौर के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि दोषी कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए।
जांच के आदेश
नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर संभव अयाची ने कहा कि निगम की ओर से कठुंदा में गाय और अन्य पशुओं के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करोंदा स्थित केंद्र में की गई है। यदि इस तरह के आरोप सामने आए हैं तो उनकी जांच की जाएगी और संबंधित व्यक्तियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मृत गायों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित किया जाए, बंद पड़ी गो-एंबुलेंस को तुरंत चालू किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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