दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर लगातार दूसरे दिन भी सदन में भारी हंगामा हुआ। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब से जुड़े एक आर्टिकल को सदन में पेश करने की कोशिश की और कहा कि उन्हें बोलने दिया जाए। जैसे ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन-भारत संबंधों का जिक्र किया, एनडीए सांसदों ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी।
हंगामे के बीच राहुल करीब 14 मिनट तक बोलने की कोशिश करते रहे, लेकिन शोर बढ़ने पर पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने उन्हें रोक दिया और अन्य दलों के सांसदों को बोलने के लिए कहा। राहुल के समर्थन में सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल, तृणमूल कांग्रेस की शताब्दी रॉय और डीएमके सांसद डी एम कातिर आनंद ने बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए और पीठासीन की कुर्सी की ओर कागज उछाले।
स्थिति बिगड़ने पर सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में पीठासीन दिलीप सैकिया ने नियम 374 के तहत हंगामा और अनुशासनहीनता के आरोप में 8 विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने की घोषणा की। निलंबन के ऐलान के बाद भी विपक्षी सांसदों ने फिर से कागज उछाले और विरोध जारी रखा।
निलंबन के विरोध में राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में नारेबाजी की। राहुल गांधी ने शाम को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर बोलने से रोका जा रहा है, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख विषय था, जिस पर चर्चा होना जरूरी है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर बहस से भागने और लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप लगाया। लगातार हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
Tags
national
