दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 60 लाख रुपये की साइबर ठगी का बड़ा प्रयास थाना गढ़ा पुलिस और बैंक की सतर्कता से विफल हो गया। समय रहते कार्रवाई होने से हाथीताल कॉलोनी के एक बुजुर्ग दंपत्ति को भारी आर्थिक नुकसान से बचा लिया गया।
फोन पर खुद को अधिकारी बताकर डराया
हाथीताल कॉलोनी निवासी 70 वर्षीय सुब्रत सेन और उनकी 68 वर्षीय पत्नी श्रीमती मीना सेन को अज्ञात लोगों ने मोबाइल पर संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को पुलिस/सीबीआई जैसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताया और दंपत्ति को गंभीर कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर “डिजिटल अरेस्ट” में होने का झांसा दिया।
आरोपियों ने लगातार निगरानी में रहने को मजबूर करते हुए 60 लाख रुपये की मांग की। डर के कारण दंपत्ति ने 55 लाख रुपये ट्रांसफर करने का प्रयास भी किया, लेकिन तकनीकी कारणों से राशि वापस खाते में लौट आई।
बैंक पहुंचकर दोबारा ट्रांसफर की कोशिश
दंपत्ति फिर से थाना गढ़ा क्षेत्र स्थित एसबीआई मेडिकल शाखा में 55 लाख रुपये ट्रांसफर करने पहुंचे। बैंक कर्मचारियों को संदेह होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने दंपत्ति को थाना गढ़ा लाकर पूरी जानकारी दी और समझाइश दी, जिसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार बनने वाले थे।
साइबर सेल की मदद से जांच शुरू
थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने संबंधित मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच (सीडीआर और लोकेशन ट्रेसिंग) शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
एसपी के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि ऐसे साइबर गिरोह लोगों को मानसिक दबाव में लेकर बड़ी रकम ठगने की कोशिश करते हैं।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं
जबलपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, कस्टम या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए या पैसे मांगे घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काट दें, किसी को बैंक विवरण न दें। नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत सूचना दें।
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