दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्य प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में जबलपुर की विशेष अदालत ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने मंत्री से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए।
विशेष न्यायालय (सांसद-विधायक प्रकरण) के न्यायाधीश डी.पी. सूत्रकार ने मंत्री को 7 अप्रैल 2026 को अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
तिरंगा यात्रा के दौरान अपमान का आरोप
नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने अदालत में परिवाद दायर कर आरोप लगाया है कि 11 अगस्त 2024 को गाडरवारा में आयोजित ‘तिरंगा यात्रा’ के दौरान मंत्री राव उदय प्रताप सिंह एक खुली जीप के बोनट पर बैठे हुए थे।
परिवाद में कहा गया है कि इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज को जीप के बोनट पर इस तरह लगाया गया था कि वह झुक रहा था और पास खड़े एक कार्यकर्ता के पैर से टच हो रहा था। इसे तिरंगे की गरिमा के विरुद्ध और आपत्तिजनक बताया गया है।
तीन साल तक की सजा का प्रावधान
परिवादी के अनुसार यह कृत्य राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के प्रावधानों का उल्लंघन है। कानून के मुताबिक वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य हिस्से को ढकने या अनुचित तरीके से राष्ट्रीय ध्वज लगाने पर यह अपराध माना जाता है। इस मामले में दोष सिद्ध होने पर अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
पुलिस ने नहीं दर्ज की शिकायत
परिवादी ने अदालत को बताया कि घटना के बाद गाडरवारा थाने में शिकायत देने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने मंत्री के पद का हवाला देकर एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर को भी कई बार लिखित शिकायतें भेजी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि पंजीकृत डाक से भेजी गई शिकायत भी थाना प्रभारी ने लेने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
परिवादी ने अपने परिवाद में ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
मामले में घटना की तस्वीरें, मीडिया क्लिपिंग, डाक अस्वीकार की ट्रैकिंग रिपोर्ट और विभिन्न अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों की प्रतियां भी अदालत में प्रस्तुत की गई हैं।
अदालत ने प्रारंभिक साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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