दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जबलपुर में मानव तस्करी के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है, जहां शादी के नाम पर नाबालिग लड़कियों को खरीदने-बेचने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस पूरे नेटवर्क का सरगना एक पूर्व सरपंच निकला, जो दलालों और सहयोगियों के जरिए मासूमों की जिंदगी का सौदा कर रहा था।
16 साल की लड़की को 1 लाख में खरीदा, 2 लाख में बेचा
घमापुर क्षेत्र से 6 दिसंबर 2025 को लापता हुई 16 वर्षीय लड़की को आरोपियों ने पहले 1 लाख रुपए में खरीदा और फिर 2 लाख रुपए में गुना जिले के एक युवक को बेच दिया। वहां परिवार की मौजूदगी में उसकी जबरन शादी कराई गई।
नाबालिग का अपने पड़ोस के युवक से प्रेम संबंध था। 6 दिसंबर को वह उससे मिलने निकली, लेकिन विवाद के बाद युवक उसका मोबाइल लेकर भाग गया। डरी-सहमी लड़की जबलपुर रेलवे स्टेशन पर अकेली बैठी थी, तभी उसकी मुलाकात आरोपी मनीष सपेरा से हुई, जिसने उसे बहलाकर अपने जाल में फंसा लिया।
मंडला से सीहोर होते हुए सौदे तक पहुंची
आरोपी मनीष और उसका भांजा अर्जुन लड़की को पहले मंडला ले गए, जहां दो दिन तक उसे रखा गया। इसके बाद सीहोर जिले के चांदबड़ गांव में पूर्व सरपंच राकेश कोरबे को 1 लाख रुपए में बेच दिया गया।
दलालों को 10-10 हजार, सरगना ने रखा बड़ा हिस्सा
पूर्व सरपंच ने पूछताछ में खुलासा किया कि गिरोह में काम के हिसाब से रकम बांटी जाती थी। उसने दलालों—हेमराज कुमारिया, हेमराज विश्वकर्मा, जतन बाई और राय सिंह गुर्जर—को 10-10 हजार रुपए दिए और बाकी रकम खुद रखी।
एक कॉल ने खोला राज
19 दिसंबर को पीड़िता ने पड़ोसी के मोबाइल से अपने नंबर पर कॉल किया, जो उसके प्रेमी के पास था। पुलिस पहले से मोबाइल ट्रेस कर रही थी, जिससे लोकेशन मिलते ही टीम शाजापुर और गुना पहुंची और लड़की को 22 दिसंबर को बरामद कर लिया।
9 आरोपी गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क की आशंका
इस मामले में पुलिस ने अप्रैल 2026 तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पूर्व सरपंच, दलाल, पंडित और खरीदार शामिल हैं। पुलिस को शक है कि यह एक बड़ा अंतरराज्यीय मानव तस्करी नेटवर्क है और पूछताछ में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
महिला थाना और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाईआरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 142, 143, 144 के तहत मानव तस्करी का मामला दर्ज किया गया है। एसपी के निर्देश पर महिला थाना और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई से इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
