दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मामूली विवाद में एक पुलिस आरक्षक ने हाईकोर्ट के वकील के घर में घुसकर मारपीट कर दी। हैरानी की बात यह रही कि सीसीटीवी फुटेज दिखाने के बावजूद पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज नहीं की, बल्कि समझौते के लिए दबाव बनाया गया।
बच्चों के शोर से शुरू हुआ विवाद, मारपीट तक पहुंचा मामला
जानकारी के मुताबिक, 11 अप्रैल की शाम सिविल लाइन स्थित समीक्षा टाउन में रहने वाले अधिवक्ता पंकज शर्मा के घर के बाहर बच्चे शोर कर रहे थे। उनकी पत्नी ने बच्चों को शांत रहने के लिए कहा, जिससे नाराज होकर पास में किराए से रहने वाला पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी (मदनमहल थाना) गाली-गलौच करने लगा।
देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और आरक्षक ने वकील पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचे पड़ोसियों और महिलाओं से भी अभद्रता की गई। इस हमले में अधिवक्ता के चेहरे पर चोट आई।
VIDEO होने के बाद भी नहीं दर्ज हुई FIR
घटना के बाद अधिवक्ता पंकज शर्मा सीसीटीवी फुटेज लेकर सिविल लाइन थाने पहुंचे, लेकिन थाना प्रभारी और स्टाफ ने वीडियो देखने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें करीब 3 घंटे तक थाने में बैठाए रखा गया और समझौते के लिए दबाव बनाया गया।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, तब दर्ज हुई FIR
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ता ने 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसके बाद 25 अप्रैल को घटना के 14 दिन बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की।
FIR पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ता के वकील धर्मेंद्र सोनी ने FIR में कई खामियां बताई हैं। उनका आरोप है कि FIR दर्ज करते समय पीड़ित को सूचना नहीं दी गई और जहां उनके हस्ताक्षर होने चाहिए थे, वहां किसी अन्य के हस्ताक्षर कर दिए गए। साथ ही, FIR में एक अन्य पुलिसकर्मी का नाम भी जोड़ दिया गया, जिसका मामले से कोई संबंध नहीं है।
FIR के बाद आरोपी ने खाली किया मकान
FIR दर्ज होने के बाद आरक्षक साकेत तिवारी ने उसी दिन किराए का मकान खाली कर दिया और कहीं और चले गए। मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट में 29 अप्रैल को सुनवाई होगी।
Tags
jabalpur


