दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। करोड़ों की लागत से बना जबलपुर का नवनिर्मित फ्लाईओवर अपनी मजबूती को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। दमोह नाका - मदन महल फ्लाईओवर से मदनमहल स्टेशन के समीप मंगलवार दोपहर अचानक फ्लाईओवर के ऊपरी हिस्से से कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े गिरने लगे। गनीमत रही कि उस समय नीचे से गुजर रहे राहगीर इसकी चपेट में नहीं आए, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की निर्माण गुणवत्ता और लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। नीचे गुजर रहे लोगों में मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर जब यातायात सामान्य रूप से चल रहा था, तभी फ्लाईओवर के एक हिस्से से भारी कंक्रीट टूटकर नीचे गिरने लगी। पत्थरों की बारिश देख नीचे से गुजर रहे वाहन चालकों और राहगीरों में भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत वहां से लोगों को हटाया और ट्रैफिक को सुरक्षित दिशा में मोड़ा। मौके पर गिरे कंक्रीट के टुकड़े इतने विशाल थे कि उन्हें देख निर्माण कार्य की भयावहता साफ नजर आ रही थी।
घटना के बाद जब PWD ब्रिज डिवीजन के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इसे बेहद हल्के में लिया। PWD के कार्यपालन यंत्री (EE) शिवेंद्र सिंह ने इसे निर्माण के समय बची हुई अतिरिक्त सीमेंट (स्लरी या स्लज) का झड़ना बताया। उनके अनुसार, मौसम में बदलाव के कारण यह अतिरिक्त हिस्सा गिरा है। हालांकि, मौके पर गिरे हुए भारी-भरकम टुकड़ों को "स्लरी" बताना विभाग के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। स्थिति यह थी कि मरम्मत के लिए पहुंचे कर्मचारी भी उन टुकड़ों को उठाने में मशक्कत करते दिखे।उद्घाटन के समय भी विवादों में रहा फ्लाईओवर
यह पहला मौका नहीं है जब इस फ्लाईओवर की सुरक्षा पर सवाल उठे हों। पिछले साल उद्घाटन से ठीक पहले भी इसमें दरारें देखी गई थीं। उस समय भी विभाग ने इसे "टेक्निकल एक्सपेंशन" बताकर क्लीन चिट दे दी थी। लेकिन अब कंक्रीट के टुकड़ों का गिरना साबित कर रहा है कि कहीं न कहीं निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
मीडिया की सक्रियता के बाद शुरू हुआ सुधार कार्य
जैसे ही ग्राउंड जीरो पर मीडिया की टीम पहुंची और अधिकारियों से जवाब तलब किया गया, विभाग कुंभकर्णी नींद से जागा। आनन-फानन में मशीनों और मजदूरों को मौके पर भेजकर मरम्मत कार्य और "चिपिंग" (अतिरिक्त कंक्रीट हटाना) का काम शुरू कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह निगरानी पहले रखी जाती, तो आज आम जनता की जान जोखिम में नहीं पड़ती।
विभाग की इस लापरवाही पर अब जनता सवाल पूछ रही है कि यदि भविष्य में कोई जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या ठेकेदार और संबंधित इंजीनियरों पर ठोस कार्रवाई की जाएगी?


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