MP News: कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी, मोहन यादव सरकार से हट सकते हैं 5 मंत्री, 8 नए चेहरों को मौका संभव

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार अपने कार्यकाल के पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल (Cabinet Reshuffle) की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इन बदलावों के संकेत देते हुए कहा है कि विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के बाद यह फेरबदल किया जा सकता है। इस बार मंत्रियों के परफॉर्मेंस (कामकाज) को ही बदलाव का मुख्य आधार बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान कैबिनेट से 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि 7 से 8 नए चेहरों को टीम में शामिल किया जा सकता है।

सीएम बोले- कामकाज और परफॉर्मेंस के आधार पर होगा फैसला

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन की राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा की जाती है। इस फेरबदल का अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। आगामी रणनीतियों को देखते हुए नए मंत्रिमंडल में युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को भी सहेजा जाएगा।

इन 5 मंत्रियों पर मंडरा रहा है हटने का खतरा

हालिया परफॉर्मेंस समीक्षा और विभिन्न विवादों के कारण इन मंत्रियों की कुर्सी पर संकट बताया जा रहा है:

  • विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी और सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद संगठन इनसे नाराज चल रहा है।

  • एदल सिंह कंषाना: रेत खनन को लेकर विवादित बयान और स्टाफ द्वारा तबादलों के एवज में रिश्वत मांगने का मामला सामने आने से स्थिति कमजोर है।

  • दिलीप अहिरवार: पहली बार के विधायक अहिरवार का कामकाज हालिया समीक्षा में अपेक्षित स्तर का नहीं पाया गया।

  • प्रतिमा बागरी: जाति प्रमाण पत्र विवाद में हाईकोर्ट द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने और भाई की गिरफ्तारी के मामले से इनकी मुश्किलें बढ़ी हैं।

  • राधा सिंह: पहली बार की विधायक राधा सिंह के विभाग का प्रदर्शन भी समीक्षा में कमजोर रहा है।

वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की संभावना

कैबिनेट में मौजूद बीजेपी के दिग्गज नेताओं की भूमिका और विभागों में पुनर्संतुलन की तैयारी है:

  • प्रहलाद पटेल: इन्हें सरकार या संगठन में कोई और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है या उनके अनुभव को देखते हुए अतिरिक्त विभाग सौंपे जा सकते हैं।

  • कैलाश विजयवर्गीय: इनके विभागों में भी बदलाव की प्रबल संभावना है, हालांकि उनकी नई भूमिका को लेकर अभी संशय बना हुआ है।

  • तुलसीराम सिलावट: विभागीय पुनर्संतुलन के तहत इनके वर्तमान विभागों में कटौती या बदलाव किया जा सकता है।

इन नए चेहरों को मिल सकती है जगह

क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी कुछ नए व पुराने चेहरों को मौका दे सकती है:

  • महिला प्रतिनिधित्व: महिला वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए रीति पाठक, मालिनी गौड़ या अर्चना चिटनीस को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।

  • बुंदेलखंड और अन्य क्षेत्र: सागर से प्रदीप लारिया और पन्ना से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के नामों की चर्चा तेज है। इसके अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी वापसी की संभावना जताई जा रही है।

बीजेपी के सामने क्या हैं राजनीतिक समीकरण?

इस फेरबदल के जरिए संगठन कई मोर्चों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है:

  1. बुंदेलखंड की नाराजगी दूर करना: सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर क्षेत्रीय असंतोष कम करना।

  2. 2028 और निकाय चुनाव की तैयारी: अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनावों और आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ओबीसी वर्ग में पकड़ मजबूत करना।

  3. सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलन: ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्रियों के प्रभाव को बरकरार रखते हुए बीजेपी के मूल कैडर और पुराने नेताओं को संतुलित हिस्सेदारी देना।

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