राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सभी 8 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, चंपत राय समेत पूर्व पदाधिकारियों से पूछताछ; वकीलों का केस लड़ने से इनकार

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी (चंदा गबन) मामले की जांच अब बेहद तेज हो गई है। सोमवार को इस मामले में कई बड़े घटनाक्रम एक साथ सामने आए। एक तरफ जहां कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी 8 गिरफ्तार आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और जांच एजेंसियों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों से गहन पूछताछ की है। इस बीच, अयोध्या के स्थानीय वकीलों ने एकजुट होकर आरोपियों की पैरवी न करने का एक बड़ा ऐलान किया है।

कोर्ट ने सभी आरोपियों को भेजा जेल, पुलिस ने नहीं मांगी रिमांड

भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में सोमवार को राम मंदिर चढ़ावा चोरी के सभी 8 आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया। लगभग 30 मिनट तक चली इस सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों की आगे की रिमांड नहीं मांगी। इसके बाद माननीय अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, तब तक सभी आरोपी जिला जेल में ही बंद रहेंगे।

एसबीआई की अयोध्या धाम शाखा पहुंची पुलिस, खंगाले जा रहे बैंक खाते

जांच की कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए पुलिस की दो टीमें सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या धाम शाखा पहुंचीं। पकड़े गए 8 आरोपियों में से 7 के बैंक खाते इसी विशेष ब्रांच में हैं। पुलिस ने बैंक प्रबंधन से इन सभी खातों के स्टेटमेंट और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड हासिल कर लिए हैं। अब इस बात की कड़ाई से जांच की जा रही है कि राम मंदिर में नौकरी शुरू करने के बाद से इन आरोपियों के खातों में कब-कब और कितनी मोटी रकमें जमा की गईं। इसके साथ ही, पुलिस ने नोटों की गिनती में शामिल रहे बैंक के दो कर्मचारियों को भी नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है।

पूर्व महासचिव चंपत राय और पदाधिकारियों के बयान दर्ज

चढ़ावा चोरी के इस महाघोटाले की आंच अब ट्रस्ट के शीर्ष पदों तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और एसआईटी की टीम ने रविवार को ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से लंबी पूछताछ की और उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए। बयान दर्ज होने के बाद चंपत राय दिल्ली के लिए रवाना हो गए। हालांकि, इस मामले में दर्ज पहली एफआईआर (FIR) में बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं, लेकिन उनके करीबियों की संलिप्तता ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्ञात हो कि इस खुलासे के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।

अयोध्या के वकीलों का बड़ा फैसला— 'केस लड़ा तो लगेगा 5 लाख का जुर्माना'

इस मामले को लेकर अयोध्या के स्थानीय अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। फैजाबाद एडवोकेट्स एसोसिएशन और बार एसोसिएशन की एक बड़ी सामान्य सभा की बैठक सोमवार को बुलाई गई। बैठक के बाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने ऐलान किया कि राम मंदिर का चढ़ावा चोरी करना करोड़ों सनातनियों की आस्था पर चोट है, इसलिए अयोध्या का कोई भी वकील इन आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। अगर कोई वकील इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही वकीलों ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को 3 दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने या उन्हें तुरंत जेल भेजने की मांग की है।

मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, विपक्ष ने साधा निशाना

यह पूरा प्रकरण अब देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के दरवाजे तक भी पहुंच गया है। वकील अनूप अवस्थी ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग को लेकर एक याचिका दाखिल की थी, जिस पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने पूछा कि 'इतनी जल्दी क्या है?' और कहा कि इस पर छुट्टियों के बाद ही सुनवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ, राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर घमासान शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर तीखा तंज कसते हुए कहा: "मर्यादा की बात में किसी बिल की नहीं, बल्कि ईमानदारी और साफ नियत की जरूरत होती है। जो लोग भी रात के अंधेरे में प्रभु श्री राम का चढ़ावा चोरी कर दूसरे प्रदेशों में ले गए हैं, वे चुपचाप वहां के सीसीटीवी बंद करें और सारा धन वापस लाकर भगवान के चरणों में रख दें, प्रभु राम उन्हें माफ कर देंगे। लेकिन भाजपा तो भगवान से भी माफी नहीं मांगना चाहती।"

वहीँ, कांग्रेस का एक 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है, जिससे आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक पारा और चढ़ना तय माना जा रहा है।

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