MP News: पुलिस के 15 हजार कर्मियों पर डिमोशन का खतरा, नए प्रमोशन नियम लागू होने के बाद शुरू हुई समीक्षा, पांढुर्णा में 32 कार्यवाहक हेड कॉन्स्टेबल फिर बने आरक्षक

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पिछले करीब पांच वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर काम कर रहे लगभग 15 हजार अधिकारी और कर्मचारियों पर मूल पद पर लौटने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम-2025 लागू किए जाने के बाद पुलिस विभाग में नियमित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

नए नियमों के तहत तय मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले अधिकारी और कर्मचारियों से कार्यवाहक प्रभार वापस लेकर उन्हें उनके मूल पद पर भेजा जाएगा। वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नति लंबे समय तक रुकी रहने के कारण वर्ष 2021 से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब इन सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है।

इस कार्रवाई की शुरुआत पांढुर्णा जिले से हुई है। यहां पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में कार्यरत 32 पुलिसकर्मियों का प्रभार समाप्त कर उन्हें दोबारा आरक्षक पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। विभाग के अनुसार यह कार्रवाई मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है।

सूत्रों के मुताबिक नियमित डीपीसी से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसमें वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर), विभागीय दंड, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई और न्यायालयों में लंबित मामलों को आधार बनाया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होगा, उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिलेगी और उनका कार्यवाहक प्रभार भी समाप्त कर दिया जाएगा।

प्रारंभिक समीक्षा में करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे चिन्हित हुए हैं, जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा असर पड़ सकता है। अगले चार से पांच दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। आगे चलकर प्रभावित होने वालों की संख्या 15 हजार तक पहुंच सकती है।

वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति पर उच्च पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे कई पुलिसकर्मियों का कहना है कि मूल पद पर लौटने से उनके मनोबल और कार्यक्षमता पर असर पड़ेगा। हालांकि विभाग का कहना है कि नियमित पदोन्नति पूरी तरह नियमों के अनुसार होगी और केवल पात्र अधिकारी-कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post