दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जिला अधिवक्ता संघ, जबलपुर के सत्र 2026-28 के चुनाव के लिए मंगलवार 28 जुलाई को दोबारा मतदान कराया जा रहा है। 20 जुलाई को हुए पहले मतदान के दौरान बैलेट पेपर को लेकर विवाद, कथित अनियमितताओं और फर्जी मतदान के आरोपों के बाद चुनाव प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। अब नए मुख्य चुनाव अधिकारी की निगरानी में पुनर्मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराया जा रहा है। मंगलवार सुबह 10:30 बजे शुरू हुई मतदान प्रक्रिया शाम 5 बजे तक जारी रही। दोपहर 2 बजे तक करीब 2133 अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। मतदान केंद्र पर अधिवक्ताओं में उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के समर्थन में वोट डालने पहुंचे।
3,313 मतदाता तय करेंगे 90 प्रत्याशियों का भविष्य
इस बार जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में कुल 3,313 अधिवक्ता मतदाता विभिन्न पदों के लिए मैदान में उतरे 90 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों को सुरक्षित रखा जाएगा और 29 जुलाई को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
अध्यक्ष पद पर मनीष मिश्रा और नरेंद्र जैन के बीच मुख्य मुकाबला
अध्यक्ष पद के लिए इस बार कुल छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन चुनावी चर्चा मुख्य रूप से वर्तमान अध्यक्ष मनीष मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन के बीच केंद्रित रही। चुनावी माहौल में मनीष मिश्रा का पलड़ा अपेक्षाकृत भारी माना जा रहा है। युवा अधिवक्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़, व्यक्तिगत संपर्क और अधिवक्ताओं के सुख-दुख में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में बड़ा आधार मानी जा रही है।
वहीं पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन अपने अनुभव, पुराने संगठनात्मक नेटवर्क और समर्थकों के भरोसे मुकाबले को रोचक बनाए हुए हैं। अध्यक्ष पद पर वर्तमान उपाध्यक्ष ज्योति राय भी महिला प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
सचिव पद पर ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी को बढ़त, शैलेंद्र सिंह ठाकुर दे रहे चुनौती
सचिव पद के लिए सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, शैलेंद्र सिंह ठाकुर और गुड्डा अवस्थी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। चुनावी चर्चाओं के अनुसार ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी की स्थिति मजबूत बताई जा रही है, जबकि शैलेंद्र सिंह ठाकुर उन्हें कड़ी चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
उपाध्यक्ष पद पर भी कांटे की टक्कर
उपाध्यक्ष पद के लिए दस प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। अधिवक्ताओं के बीच मनोज तिवारी और सचिन गुप्ता के नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं। दोनों प्रत्याशी व्यक्तिगत संपर्क और समर्थकों की सक्रियता के दम पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
30 प्रतिशत महिला आरक्षण से बढ़ी महिला अधिवक्ताओं की भूमिका
इस बार जिला अधिवक्ता संघ की कार्यकारिणी में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसके तहत उपाध्यक्ष का एक पद और कोषाध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। कार्यकारिणी के कुल 12 सदस्यों में 3 पद महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित हैं। महिला उपाध्यक्ष पद के लिए मधु राणा, वर्षा तिवारी और सुनीता सूद चुनाव मैदान में हैं। चुनावी चर्चाओं में मधु राणा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। महिला कोषाध्यक्ष पद पर नेहा मिश्रा, नीलम दत्त, रेनू वाला और रेणुका शुक्ला के बीच मुकाबला रोचक बना हुआ है।
पुस्तकालय सचिव और कार्यकारिणी में भी कड़ा मुकाबला
पुस्तकालय सचिव पद के लिए चार प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें रविंद्र दत्त अधिवक्ताओं की पसंद के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। वहीं कार्यकारिणी सभा सदस्य के 12 पदों के लिए 51 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
3,313 मतदाता तय करेंगे 90 प्रत्याशियों का भविष्य
इस बार जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में कुल 3,313 अधिवक्ता मतदाता विभिन्न पदों के लिए मैदान में उतरे 90 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों को सुरक्षित रखा जाएगा और 29 जुलाई को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
अध्यक्ष पद पर मनीष मिश्रा और नरेंद्र जैन के बीच मुख्य मुकाबला
अध्यक्ष पद के लिए इस बार कुल छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन चुनावी चर्चा मुख्य रूप से वर्तमान अध्यक्ष मनीष मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन के बीच केंद्रित रही। चुनावी माहौल में मनीष मिश्रा का पलड़ा अपेक्षाकृत भारी माना जा रहा है। युवा अधिवक्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़, व्यक्तिगत संपर्क और अधिवक्ताओं के सुख-दुख में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में बड़ा आधार मानी जा रही है।
वहीं पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन अपने अनुभव, पुराने संगठनात्मक नेटवर्क और समर्थकों के भरोसे मुकाबले को रोचक बनाए हुए हैं। अध्यक्ष पद पर वर्तमान उपाध्यक्ष ज्योति राय भी महिला प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
सचिव पद पर ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी को बढ़त, शैलेंद्र सिंह ठाकुर दे रहे चुनौती
सचिव पद के लिए सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, शैलेंद्र सिंह ठाकुर और गुड्डा अवस्थी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। चुनावी चर्चाओं के अनुसार ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी की स्थिति मजबूत बताई जा रही है, जबकि शैलेंद्र सिंह ठाकुर उन्हें कड़ी चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
उपाध्यक्ष पद पर भी कांटे की टक्कर
उपाध्यक्ष पद के लिए दस प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। अधिवक्ताओं के बीच मनोज तिवारी और सचिन गुप्ता के नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं। दोनों प्रत्याशी व्यक्तिगत संपर्क और समर्थकों की सक्रियता के दम पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
30 प्रतिशत महिला आरक्षण से बढ़ी महिला अधिवक्ताओं की भूमिका
इस बार जिला अधिवक्ता संघ की कार्यकारिणी में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसके तहत उपाध्यक्ष का एक पद और कोषाध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। कार्यकारिणी के कुल 12 सदस्यों में 3 पद महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित हैं। महिला उपाध्यक्ष पद के लिए मधु राणा, वर्षा तिवारी और सुनीता सूद चुनाव मैदान में हैं। चुनावी चर्चाओं में मधु राणा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। महिला कोषाध्यक्ष पद पर नेहा मिश्रा, नीलम दत्त, रेनू वाला और रेणुका शुक्ला के बीच मुकाबला रोचक बना हुआ है।
पुस्तकालय सचिव और कार्यकारिणी में भी कड़ा मुकाबला
पुस्तकालय सचिव पद के लिए चार प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें रविंद्र दत्त अधिवक्ताओं की पसंद के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। वहीं कार्यकारिणी सभा सदस्य के 12 पदों के लिए 51 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
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