राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: शेयर बाजार में लगाया था चोरी का पैसा, SIT जांच को अखिलेश ने बताया 'लीपापोती'

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) अयोध्या।
अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और पुलिस की रिमांड पर चल रहे आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि आस्था के चढ़ावे से चोरी की गई रकम को शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश किया जाता था। वहीं, इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है और विपक्षी दलों ने सरकार व जांच टीम पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पुलिस ने बुधवार को तीनों मुख्य आरोपियों को 40 घंटे की रिमांड पर लिया था। गुरुवार सुबह पुलिस टीम आरोपी अनुकल्प मिश्रा को उसके घर लेकर पहुंची और करीब 20 मिनट तक सघन तलाशी ली। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में अनुकल्प ने स्वीकार किया है कि वह और अविनाश शुक्ला चोरी के पैसों को शेयर मार्केट में लगाते थे और लोगों को मोटी ब्याज पर भी देते थे।

पकड़े जाने से बचने के लिए वे यह रकम अपने करीबियों और रिश्तेदारों को नकद देते थे और फिर उनके खातों से अपने बैंक अकाउंट्स में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाते थे। पुलिस ने अब तक आरोपियों के रिश्तेदारों के ऐसे 30 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें आय से अधिक का संदिग्ध लेन-देन मिला है। इसके अलावा, अनुकल्प द्वारा पिछले साल खरीदी गई एक कार की भी जांच की जा रही है कि क्या वह चोरी के पैसे से ली गई थी।

राम मंदिर में हुए इस घोटाले को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा हमारे धर्म में चढ़ावे की चोरी महापाप है और इन लोगों ने यह महापाप किया है। इस घटना से सनातनी बेहद दुःखी हैं। SIT इस पूरे मामले में सिर्फ लीपापोती कर रही है। सुनने में तो यहां तक आया है कि खुद SIT के ही एक सदस्य पर धारा 420 (धोखाधड़ी) का मुकदमा दर्ज है। यह दिल्ली और लखनऊ की आपसी लड़ाई का नतीजा है।

अखिलेश यादव ने मांग की कि मंदिर परिसर में तैनात रहे लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाले जाएं, जिससे सच सामने आ सके। वहीं, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भी इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक संगठित गिरोह का काम है और तत्कालीन महासचिव चंपत राय इससे बेदाग कैसे बच सकते हैं।

अखिलेश यादव और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मुलाकात पर योगी सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा साधु-संतों और धार्मिक गुरुओं का सम्मान करती है, जबकि कांग्रेस और सपा ने हमेशा मंदिर निर्माण और सनातनी मूल्यों का विरोध किया है। उन्होंने शंकराचार्य से अपील की कि वे सनातन विरोधी नेताओं के एजेंडे का हिस्सा न बनें।

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, दान को इकट्ठा करने और उसकी गिनती की प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई, जिसकी सीधी जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्रा की थी। अनिल मिश्रा ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा तय सुरक्षा नियमों (जैसे बिना जेब वाली ड्रेस, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और तलाशी) को कमजोर कर दिया था। माना जा रहा है कि 15 जुलाई को SIT की फाइनल रिपोर्ट आने और 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक के बाद डॉ. मिश्रा पर बड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इसके साथ ही, SIT ने अब ट्रस्ट द्वारा कराए गए बड़े आयोजनों के खर्चों के बिल और वाउचर खंगालने शुरू कर दिए हैं। इसमें 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह (खर्च ₹113 करोड़) और 25 नवंबर 2025 को हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम (खर्च ₹10.12 करोड़) शामिल हैं।

इस बीच, पूर्व महासचिव चंपत राय का SIT को दिया गया एक कथित जवाब वाला पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पत्र में उन्होंने दावा किया है कि बैंक (SBI) के साथ हुए एमओयू (MOU) की उन्हें जानकारी नहीं थी और उस पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना बैंक के साथ करार किया गया और बैंक अधिकारियों ने नोटों की गिनती के दौरान तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया।

घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया है। चंपत राय की जगह रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया है। पद संभालते ही कृष्ण मोहन ने कहा कि मैनेजमेंट की कमियों का फायदा उठाकर यह चोरी की गई। उनका पहला प्रयास इन सुरक्षा कमियों को दूर करना, दोषियों को कड़ी सजा दिलाना और समाज में ट्रस्ट की धूमिल हुई छवि को सुधारकर दोबारा विश्वास स्थापित करना है।

 पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से करीब 80 लाख रुपये की नकद राशि और फर्जी चंदा रसीदें बरामद की जा चुकी हैं।

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