दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। जिला कोर्ट परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक के फर्जी वकील बनकर घूमने का मामला सामने आया। युवक काला कोट पहनकर पेशी पर आए लोगों से केस से जुड़ी बातचीत कर रहा था। उसकी गतिविधियों पर कुछ अधिवक्ताओं को शक हुआ, जिसके बाद पूछताछ में मामला सामने आया।
अधिवक्ताओं ने युवक से उसकी पहचान के बारे में पूछा तो उसने अपना नाम सचिन ताम्रकार बताया और खुद को अधिवक्ता बताते हुए हाईकोर्ट बार का कार्ड दिखाया। हालांकि, अधिवक्ताओं ने कार्ड पर दर्ज सदस्यता नंबर की जांच की तो हाईकोर्ट बार में उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। कार्ड पर बार सचिव परितोष त्रिवेदी के हस्ताक्षर भी दर्ज थे।
संदेह बढ़ने पर अधिवक्ताओं ने सचिन को पकड़कर ओमती थाना पुलिस के हवाले कर दिया। अधिवक्ता अरविंद दुबे की शिकायत पर पुलिस ने सचिन ताम्रकार के खिलाफ बीएनएस की धारा 319(1) और 336(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी कार्ड कहां और किसने तैयार किया था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि युवक कब से खुद को अधिवक्ता बताकर लोगों से संपर्क कर रहा था और क्या उसने किसी पक्षकार से केस के नाम पर पैसे या अन्य लाभ लिए हैं।
घर के बाहर लगा रखा था एडवोकेट का बोर्ड
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सचिन ताम्रकार ने गढ़ा थाना क्षेत्र के ज्योति नगर स्थित अपने घर के बाहर ‘एडवोकेट’ का बोर्ड लगा रखा था। बोर्ड पर उसके नाम के साथ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर और मोबाइल नंबर दर्ज था। पूछताछ में उसने अपनी पत्नी कल्पना ताम्रकार के साथ जिला और हाईकोर्ट में वकालत करने का दावा भी किया।
अधिवक्ता संघ ने जताई नाराजगी
मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई और कोर्ट परिसर में फर्जी अधिवक्ता बनकर घूमने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं ने पुलिस को कुछ कार्ड और फोटो भी सौंपे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
अधिवक्ताओं ने लोगों से अपील की है कि किसी व्यक्ति को वकील नियुक्त करने से पहले उसकी बार सदस्यता और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की पुष्टि जरूर करें। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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