Jabalpur News: विदेशों में धन भेजने के मामले में आयकर विभाग का बड़ा एक्शन; विजयनगर, मुस्कान सिटी और नेपियर टाउन में सीए के ठिकानों पर छापे

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। विदेशों में भेजे गए बड़े धन और वित्तीय लेन-देन में भारी अनियमितताओं की आशंका को लेकर आयकर विभाग ने देशव्यापी बड़ा अभियान शुरू किया है। 18 अगस्त 2026 से शुरू हुई इस देशव्यापी जांच के तहत आयकर विभाग की टीमों ने मध्य प्रदेश के जबलपुर, भोपाल और सतना में ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। जबलपुर में विभाग की टीमों ने तीन प्रमुख चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (सीए) के ठिकानों और एक प्राइवेट कंपनी पर दबिश देकर विदेशी भुगतान व फॉर्म 15CB से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है।

जबलपुर के तीन प्रमुख इलाकों में आयकर की दबिश

आयकर विभाग की अलग-अलग टीमों ने जबलपुर शहर के तीन बड़े व्यावसायिक व आवासीय इलाकों—विजयनगर, मुस्कान सिटी और नेपियर टाउन में एक साथ कार्रवाई शुरू की। यहां स्थित तीन सीए के दफ्तरों में टीमों ने डेरा डालकर विदेशी लेन-देन, बैंक खातों और कंप्यूटर रिकॉर्ड को खंगालना शुरू कर दिया है। इसके अलावा एक कंपनी का नाम भी इस जांच के घेरे में आया है, जिसके जरिए विदेशी खातों में बड़ी रकम हस्तांतरित किए जाने की जानकारी मिली है।

फॉर्म 15CB की जांच से खुला मामला

विदेशों में धन भेजने (Foreign Remittance) के लिए सीए द्वारा जारी किए जाने वाले 'फॉर्म 15CB' (Form 15CB) का डेटा एनालिसिस करने पर आयकर विभाग को गंभीर गड़बड़ियां मिलीं। जांच में सामने आया कि कुछ ही प्रोफेशनल्स द्वारा बेहद कम समय में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में फॉर्म 15CB जारी किए गए थे। विभाग अब यह जांच कर रहा है कि क्या ये प्रमाण पत्र जारी करने से पहले जरूरी वित्तीय नियमों और जांच-पड़ताल का पालन किया गया था या नहीं।

देशभर में 394 संस्थाएं और 36 प्रोफेशनल्स जांच के घेरे में

आयकर विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह जांच किसी एक शहर तक सीमित न होकर राष्ट्रव्यापी है। विभाग ने देशभर में करीब 394 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) को जांच के दायरे में लिया है, जिनमें सीमावर्ती राज्यों की 117 संस्थाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा 36 प्रोफेशनल्स (सीए व वित्तीय सलाहकार) की भूमिका की जांच की जा रही है।

बिना कारोबार और बिना आईटीआर विदेश भेजी गई मोटी रकम

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, कई ऐसी संस्थाएं पकड़ में आई हैं जो सालों से आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं कर रही थीं या जिनका सालाना टर्नओवर नगण्य था, लेकिन उनके खातों से विदेशों में करोड़ों रुपये भेजे गए।

इतना ही नहीं, जांच में कई संस्थाएं अपने दिए गए पते पर भी मौजूद नहीं मिलीं। सॉफ्टवेयर, माल ढुलाई (Freight) और परामर्श शुल्क (Consultancy Services) के नाम पर विदेशों में किए गए बोगस भुगतानों के वास्तविक कारणों और कागजी दावों की जमीनी हकीकत परखी जा रही है।

आयकर विभाग की यह कार्रवाई अगले दो से तीन दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

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