दैनिक सांध्य बन्धु इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर ने रविवार को अपने वीर सपूत मेजर हमजा आरिफ को पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। एक माह पहले जिस घर में शादी की खुशियां थीं, वहीं अब मातम का माहौल था। तिरंगे में लिपटे मेजर हमजा आरिफ के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुबह सैफी नगर में जनाजे की नमाज के बाद सेना के वाहन में तिरंगे से लिपटा पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए रवाना हुआ। यात्रा सैफी नगर, माणिकबाग पुल, कलेक्टर चौराहा, राजबाड़ा और सदर बाजार होते हुए इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंची। पूरे रास्ते लोगों ने भारत माता की जय और मेजर हमजा आरिफ अमर रहें के नारों के साथ अपने वीर सपूत को अंतिम सलाम किया।
अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
सबसे भावुक क्षण तब आया जब मेजर हमजा आरिफ की पत्नी ज्योति अरोरा ने कांपते हाथों से तिरंगे में लिपटे अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि दी। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना के अधिकारियों ने सम्मानस्वरूप तिरंगा उन्हें सौंपा, जिसे उन्होंने सीने से लगाकर अपने आंसुओं के बीच स्वीकार किया।
परिजनों के अनुसार, मेजर हमजा आरिफ का विवाह करीब एक माह पहले ही हुआ था। छुट्टियां बिताने के बाद वे अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि नई जिंदगी की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद वे तिरंगे में लिपटकर घर लौटेंगे।
गौरतलब है कि गुरुवार देर रात राजस्थान के जैसलमेर जिले में सैन्य ड्यूटी से लौटते समय सेना की टाटा सफारी के सामने अचानक एक ऊंट आ जाने से भीषण सड़क हादसा हो गया। टक्कर के बाद वाहन कई बार पलटा, जिसमें 31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ की मौके पर ही मृत्यु हो गई। उनके साथ मौजूद दो लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका इलाज सैन्य अस्पताल में जारी है।
करीब नौ वर्षों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे मेजर हमजा आरिफ अपने पीछे माता-पिता, तीन बहनों और नवविवाहिता पत्नी को छोड़ गए हैं। उनकी असमय शहादत से इंदौर सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।
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