दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के अपने दोनों संगठनात्मक पद छोड़ने की पेशकश की है। रावत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है और यदि उनके किसी मामले या उनसे जुड़े व्यक्ति की वजह से पार्टी के संघर्ष को नुकसान पहुंचता है, तो वह ऐसा नहीं चाहते।
रावत वर्तमान में कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता छोड़ने की बात नहीं कही है, बल्कि इन दोनों संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने की पेशकश की है।
PA के घर ED की कार्रवाई के बाद उठाया कदम
दरअसल, 10 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रावत के पूर्व OSD और वर्तमान PA चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। ED के मुताबिक कार्रवाई UKSSSC की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा-2016 में कथित OMR हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।
जीना के घर से ED ने 32 लाख रुपए की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना और 52.16 लाख रुपए का बैंक बैलेंस फ्रीज किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा 12 लग्जरी घड़ियां भी जब्त की गईं। ED के अनुसार जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों का मौजूदा मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपए है, जिसमें घड़ियों की कीमत शामिल नहीं है।
रावत बोले- आरोपों पर अभी विश्वास नहीं, जांच से तथ्य सामने आएंगे
चंदन सिंह जीना को लेकर हरीश रावत ने कहा कि वह उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान OSD रह चुके हैं और उस समय पार्टी तथा सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते थे। मौजूदा आरोपों को लेकर रावत ने कहा कि फिलहाल उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।
रावत ने कहा कि यदि उनके खिलाफ या उनके कार्यकाल से जुड़ी किसी गड़बड़ी के ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए।
चुनाव से पहले CBI की दस्तक का भी किया जिक्र
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब लोग उनसे चुनाव की तारीख पूछते थे तो वह मजाक में कहते थे कि चुनाव तब होंगे, जब CBI उनके दरवाजे पर दस्तक देगी।
रावत ने कहा कि इस बार उनके घर के बजाय उनके एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं।
42 हजार से ज्यादा सरकारी भर्तियों का किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान हुई सरकारी भर्तियों का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके करीब तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं।
रावत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ हो तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगते हैं। हालांकि, व्यक्तिगत हस्तक्षेप के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास उनकी संलिप्तता के प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए।
UKSSSC अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी दी सफाई
रावत ने अपने कार्यकाल में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी और इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी से भी सलाह मिली थी।
रावत के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद उन्होंने ही संबंधित व्यक्ति को पद से हटाया या उनसे इस्तीफा मांगा था। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के भविष्य में गलत आचरण करने का अनुमान पहले से लगाना संभव नहीं है।
OMR शीट में हेरफेर के मामले की जांच जारी
ED की जांच के मुताबिक VPDO परीक्षा-2016 की सुरक्षित कस्टडी में रखी OMR शीट को कथित तौर पर UKSSSC के तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक पहुंचाया गया था। आरोप है कि वहां कम भरी गई OMR शीट के रोल नंबर नोट किए गए और उन्हें निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों तक पहुंचाया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, खाली छोड़े गए उत्तरों को भरकर OMR शीट में कथित हेरफेर की गई और बाद में उन्हें दोबारा सील कर दिया गया। आरोप है कि यह काम अवैध रकम के बदले किया गया था।
ED ने मामले से जुड़े तत्कालीन UKSSSC अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कथित बिचौलियों के परिसरों पर भी तलाशी ली है। एजेंसी के मुताबिक मामले की जांच जारी है।
‘कांग्रेस की सदस्यता मेरे खून और हड्डियों में’
बाद में हरीश रावत ने एक और सोशल मीडिया पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता छोड़ने की पेशकश नहीं की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उनके “खून और हड्डियों” में है और वह जो कुछ भी हैं, उसमें कांग्रेस का बड़ा योगदान है।
उन्होंने मीडिया से उनकी पूरी पोस्ट पढ़कर ही खबर प्रकाशित करने का आग्रह किया और दोहराया कि ED की कार्रवाई के बाद उन्होंने केवल कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य और AICC कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की पेशकश की है।
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