दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में जो लोग GDP की आलोचना कर रहे हैं, वही बेरोजगार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह कर रहे हैं।
गोयल बुधवार को दिल्ली में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) की बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन का नाम लिए बिना कहा कि संभव है कि आलोचना करने वालों में पूर्व RBI गवर्नर भी शामिल हों, जो भारत में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें एक जैसे आंकड़ों की तुलना करना भी नहीं आता।
GDP 7.8% रहने पर उठे सवाल
सरकार ने सोमवार को अप्रैल-जून तिमाही के GDP आंकड़े जारी किए थे। इस अवधि में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जबकि RBI ने 7% ग्रोथ का अनुमान लगाया था। पिछले साल की इसी तिमाही में GDP ग्रोथ 6.9% रही थी।
इसके बाद पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने GDP के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर ये आंकड़े सही नहीं हैं तो पूरी अर्थव्यवस्था पर भी सवाल उठता है।
गोयल बोले- विपक्ष के पास टीवी पैनल पर जाने का काम
पीयूष गोयल ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उनके पास अब केवल टीवी पैनल पर जाकर तर्क गढ़ने का काम रह गया है।
उन्होंने कहा कि सत्य को छिपाया नहीं जा सकता। नकारात्मक मानसिकता के कारण ऐसे लोग खुद को ही छोटा कर रहे हैं। गोयल ने विपक्ष पर भारत को कमजोर और मृत अर्थव्यवस्था के रूप में पेश करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
PM मोदी ने GDP ग्रोथ को बताया था देशवासियों की ताकत
GDP के आंकड़े जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि दुनिया भर के संकटों और तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत ने पहली तिमाही में 7.8% GDP ग्रोथ हासिल की है। उन्होंने इसे देश के लोगों की ताकत का परिणाम बताया था।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा था कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण आम लोग बेरोजगारी, महंगाई और असमानता से परेशान हैं।
GDP क्या बताती है?
GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद किसी देश में एक तय अवधि के दौरान उत्पादित वस्तुओं और दी गई सेवाओं की कुल वैल्यू को दर्शाता है। इसे अर्थव्यवस्था की सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
GDP की गणना में मुख्य रूप से कंजम्प्शन, सरकारी खर्च, निवेश और नेट एक्सपोर्ट को शामिल किया जाता है। रियल GDP से उत्पादन में वास्तविक वृद्धि का अंदाजा लगाया जाता है, जबकि नॉमिनल GDP मौजूदा बाजार कीमतों पर आधारित होती है।
भारत ने GDP के आंकड़ों के लिए 2022-23 को नया बेस ईयर बनाया है। बेस ईयर की कीमतों को आधार बनाकर महंगाई के प्रभाव को अलग करते हुए अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि को मापने में मदद मिलती है।
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