दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने चुनाव से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में बदलाव करते हुए महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों की जमानत राशि बढ़ा दी है।
संशोधित नियमों के अनुसार नगर निगम महापौर पद के उम्मीदवार को अब 32 हजार रुपए जमानत राशि जमा करनी होगी। नगरपालिका परिषद अध्यक्ष के लिए यह राशि 24 हजार रुपए, नगर परिषद अध्यक्ष के लिए 16 हजार रुपए तय की गई है। नगर निगम पार्षद के लिए 8 हजार, नगरपालिका परिषद पार्षद के लिए 4,800 और नगर परिषद पार्षद के लिए 1,600 रुपए जमानत राशि निर्धारित की गई है।
महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित जमानत राशि की आधी राशि जमा करनी होगी।
2022 के नगरीय निकाय चुनाव में महापौर पद के लिए जमानत राशि 20 हजार रुपए थी। नगरपालिका अध्यक्ष के लिए 15 हजार, नगर परिषद अध्यक्ष के लिए 10 हजार और नगर निगम पार्षद के लिए 5 हजार रुपए जमानत राशि निर्धारित थी।
नामांकन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब नामांकन दाखिल करने की अवधि सात दिन से कम नहीं होगी। निर्वाचन से संबंधित सूचना प्रकाशित होने के सातवें दिन को नामांकन की अंतिम तारीख माना जाएगा। यदि सातवां दिन सार्वजनिक अवकाश है तो उसके अगले कार्यदिवस को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख होगी।
एक ही पद के लिए प्रत्याशी द्वारा दो या उससे अधिक नामांकन-पत्र प्रस्तुत किए जाने पर एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन-पत्र स्वीकार नहीं करेगा।
संशोधित नियमों में उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च का अलग हिसाब रखने का प्रावधान भी किया गया है। महापौर, नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्ष तथा पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित आय-व्यय का रिकॉर्ड रखने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग और स्वतंत्र बैंक खाता खोलना होगा। नामांकन-पत्र जमा करते समय इस खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। चुनाव से संबंधित प्राप्तियां और खर्च इसी खाते के माध्यम से दर्ज किए जाएंगे।
उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक किए गए चुनावी खर्च का लेखा प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित समय में खर्च का हिसाब प्रस्तुत नहीं करने पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ निर्धारित अवधि के लिए चुनाव लड़ने से निरर्हित करने की कार्रवाई की जा सकती है। चुनावी खर्च से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने होंगे।
संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 और मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 के संबंधित प्रावधानों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। किसी महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद मृत्यु, त्यागपत्र, निर्वाचन रद्द होने या अन्य कारण से रिक्त होने पर इसकी सूचना निर्धारित समय-सीमा में जिला निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।
नए नियमों के तहत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए जमानत राशि इस प्रकार निर्धारित की गई है—नगर परिषद पार्षद 1,600 रुपए, नगरपालिका परिषद पार्षद 4,800 रुपए, नगर निगम पार्षद 8,000 रुपए, नगर परिषद अध्यक्ष 16,000 रुपए, नगरपालिका परिषद अध्यक्ष 24,000 रुपए और नगर निगम महापौर 32,000 रुपए।
चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा भी निर्धारित है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर में महापौर पद के लिए 35 लाख रुपए और 10 लाख से कम आबादी वाले शहर में महापौर पद के लिए 15 लाख रुपए खर्च किए जा सकेंगे। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर में पार्षद के लिए 8.75 लाख और 10 लाख से कम आबादी वाले शहर में पार्षद के लिए 3.75 लाख रुपए की सीमा है।
इसी तरह एक लाख से अधिक आबादी वाली नगरपालिका में अध्यक्ष पद के लिए 2.5 लाख रुपए, 50 हजार से अधिक आबादी वाली नगरपालिका में 1.5 लाख रुपए और 50 हजार से कम आबादी वाली नगरपालिका में अध्यक्ष पद के लिए 1 लाख रुपए की व्यय सीमा निर्धारित है। नगर परिषद में पार्षद पद के लिए अधिकतम चुनावी खर्च की सीमा 75 हजार रुपए है।
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