Jabalpur News: दुर्गा पूजा पंडालों के लिए कड़े निर्देश, रात 10:30 बजे के बाद साउंड पर पाबंदी, पुलिस ऐप से नापेगी शोर; आपत्तिजनक गानों पर होगी वैधानिक कार्रवाई

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। आगामी दुर्गा उत्सव को सुरक्षित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में पुलिस कंट्रोल रूम में टेंट, ट्रेस, लाइट और साउंड संचालकों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में रात 10:30 बजे के बाद साउंड बंद रखने और निर्धारित ध्वनि सीमा का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मी साउंड मीटर ऐप के माध्यम से ध्वनि स्तर की जांच करेंगे। निर्धारित सीमा से अधिक आवाज या तय समय के बाद साउंड बजता मिला तो संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने के लिए आपत्तिजनक, अशोभनीय और विवाद उत्पन्न करने वाले गाने बजाने पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष जाखड़, अपर कलेक्टर रविशंकर राय, शैलेंद्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी, एमपीबी के एसई संजय अरोरा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, टेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी और कारोबारी मौजूद रहे।

साउंड संचालकों पर रहेगी पुलिस की नजर

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष जाखड़ ने कहा कि रात 10:30 बजे के बाद किसी भी पंडाल में साउंड नहीं बजाया जाएगा। साउंड संचालकों को निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना होगा। पुलिस गश्त और जांच के दौरान साउंड मीटर ऐप से आवाज का स्तर मापा जाएगा।

उन्होंने साउंड संचालकों से कहा कि वे देर रात तक साउंड चलाने या अत्यधिक तेज आवाज के लिए किसी के दबाव में न आएं। यदि कोई व्यक्ति दबाव बनाता है तो तत्काल 112 या संबंधित पुलिस अधिकारी को सूचना दें।

प्रत्येक पंडाल के लिए पुलिस का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जिसका मोबाइल नंबर आयोजन से जुड़े जिम्मेदार लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा।

आपत्तिजनक गानों पर भी होगी कार्रवाई

अधिकारियों ने आयोजकों और साउंड संचालकों को धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने की समझाइश दी। उन्होंने कहा कि ऐसे गीत या सामग्री नहीं बजाई जाए, जिससे किसी वर्ग की भावनाएं आहत हों या विवाद की स्थिति पैदा हो।

साउंड वाहनों में आवश्यकता से अधिक एंगल और अतिरिक्त साउंड बॉक्स नहीं लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अत्यधिक साउंड सिस्टम लगाने से वाहन की चौड़ाई बढ़ जाती है, जिससे सड़क पर दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।

साउंड वाहनों में वायरलेस माइक रखने और बच्चों तथा बुजुर्गों की सुविधा को देखते हुए अत्यधिक तेज बास से बचने की सलाह भी दी गई।

तेज आवाज की प्रतियोगिता और भारी इनाम से बचें

बैठक में डीजे संचालकों के बीच तेज आवाज की प्रतियोगिता कराने और भारी पुरस्कार राशि जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा नहीं देने की अपील की गई। बाहर से आने वाले डीजे समूहों की जानकारी भी प्रशासन को पहले से देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा साउंड और टेंट व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को नशे की हालत में काम नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस गश्त के दौरान किसी पंडाल का साउंड बंद कराया जाता है तो उसे दोबारा शुरू करने के लिए पुलिस या प्रशासन पर दबाव बनाने पर भी कार्रवाई की जाएगी।

एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड का रास्ता नहीं रोक सकेंगे पंडाल

दुर्गा पंडालों की स्थापना को लेकर भी आयोजकों को कई जरूरी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्थिति में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहनों का रास्ता बाधित नहीं होना चाहिए।

बड़े पंडालों में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए एक से अधिक प्रवेश और निकास मार्ग रखने के निर्देश दिए गए हैं। पंडाल, स्टेज और अन्य अस्थायी संरचनाओं की स्थापना इस तरह करने को कहा गया है कि आम लोगों के आवागमन और यातायात में बाधा न आए।

बिजली के तारों की रोज जांच होगी

बैठक में पिछले वर्षों की दुर्घटनाओं और हाल में सामने आई लापरवाही से जुड़े वीडियो भी दिखाए गए। इनमें खुले और कटे-फटे विद्युत तार, खराब इंसुलेशन तथा मेटल स्ट्रक्चर के संपर्क में आने वाले तारों की स्थिति दिखाई गई।

अधिकारियों ने कहा कि पंडालों में ट्रेस और अन्य मेटल स्ट्रक्चर का इस्तेमाल होने के कारण बिजली की वायरिंग में विशेष सावधानी जरूरी है। पंडालों में प्रतिदिन विद्युत व्यवस्था की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

शाम को लाइटिंग शुरू करने से पहले आयोजन समिति के जिम्मेदार व्यक्ति टेस्टर से वायरिंग और मेटल स्ट्रक्चर की जांच करेंगे। कहीं भी करंट पाए जाने पर तत्काल सुधार कराने को कहा गया है।

पंडाल की मजबूती और सुरक्षा पर भी जोर

आयोजकों को पंडाल और ट्रेस की संरचना मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि अस्थायी संरचनाओं की मजबूती के साथ-साथ आग, बिजली और भीड़ से जुड़े संभावित खतरों को ध्यान में रखकर व्यवस्था की जाए।

भीड़ अधिक होने की स्थिति में भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए प्रवेश और निकास मार्ग अलग और पर्याप्त रखने पर भी जोर दिया गया।

नोटिस, बांड और शपथपत्र की प्रक्रिया की जानकारी दी 

बैठक में आयोजन समितियों, साउंड, लाइट, टेंट और मूर्ति व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों से सुरक्षा संबंधी नोटिस, बांड और शपथपत्र भरवाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

अधिकारियों ने कहा कि इन नियमों का पालन केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं, बल्कि पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। प्रशासन और पुलिस की टीमें दुर्गा पूजा पंडालों का औचक निरीक्षण करेंगी और सुरक्षा मानकों की जांच करेंगी।

अधिकारियों ने कहा कि दुर्गा उत्सव को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस के साथ-साथ आयोजन समितियों, साउंड, लाइट और टेंट संचालकों की भी है। नियमों का पालन करके ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उत्सव की गरिमा दोनों सुनिश्चित की जा सकती हैं

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