Jabalpur News: आबकारी घूसकांड के बाद CMO सख्त, जबलपुर के कई अफसरों पर गिरेगी गाज

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्यप्रदेश में आबकारी विभाग में रिश्वतखोरी के बढ़ते मामलों ने मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) को सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। शराब ठेकेदार राकेश साहू ने जबलपुर लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि अधिकारी हर महीने उनसे पांच लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे थे। सिवनी जिले में सहायक आबकारी अधिकारी (एडीईओ) पवन झारिया के पकड़े जाने के बाद, CMO ने जबलपुर संभाग के तीन जिलों की गोपनीय रिपोर्ट तलब की है।

सिंडिकेट में शामिल नही होने वाले ठेकेदारों से टॉर्चर मनी की वसूली

सिवनी से लेकर जबलपुर तक शराब ठेकेदारों से लाखों रुपये की टॉर्चर मनी वसूली जा रही थी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कई वसूली इंस्पेक्टरों के नाम शामिल हैं, जो अपने दफ्तरों से अक्सर गायब रहते थे। अधिकांश बड़े शहरों में शराब माफिया आपस में सिंडिकेट बनाकर मन माने तरीके और निर्धारित कीमत से अधिक मुल्य में शराब बेच कर अपना व्यवसाय करते हैं। सिंडिकेट द्वारा आपस में सभी ठेकेदारों से एकत्र कर एक बड़ी राशि रिश्वत के रूप में आबकारी विभाग में नीचे से ऊपर तक रिश्वत दी जाती है। जो भी ठेकेदार इस सिंडिकेट में शामिल नहीं होता तो उसे अपना व्यवसाय चलाने में कई दिक्कतों सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला विगत दिवस जबलपुर में मोटर स्टैंड शराब ग्रुप चलने वाले ठेकेदार सुरेंद्र जायसवाल का सामने आया है। जिन्होंने अपना ठेका सरकार को सरेंडर कर दिया है। उन्होंने सरकार को लिखे एक पत्र में कहा है कि संगठित रूप से शराब व्यवसाय चलाने वाले एक सिंडिकेट एवं आबकारी के द्वारा हर माह उनसे टॉर्चर मनी की मांग के चलते हुए अपना ठेका सरेंडर कर रहे हैं। इस मामले की भी जाँच की जा रही है।

आबकारी विभाग के संरक्षण में गांव-गांव में खुलेआम बिक रही है शराब

शासन द्वारा शराब नीति के तहत यह नियम है कि ठेका लेने वाले ठेकेदार द्वारा शराब की बिक्री एक निश्चित एरिया में एक ही दुकान से की जाएगी परंतु वस्तुस्थिति यह है कि दुकान के आसपास लगे हुए ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी गांव में ठेकेदार द्वारा नियुक्त किया गए व्यक्ति अपने घरों या दुकानों में शराब की पेटियां रखकर गांवों में खुलेआम शराब पिलाते और बेचते हैं। इन्हें उप शराब दुकान की भी संज्ञा दी जा सकती है। ये व्यक्ति ठेकेदार द्वारा नियुक्त एजेंट (पेकार) कहलाते हैं, तथा इन्हें ठेकेदार द्वारा पैसे के साथ आबकारी विभाग एवं स्थानीय पुलिस थाने से भी संरक्षण प्राप्त होता है।

ठेकेदार पर नियम अनुसार नही होती है कार्यवाही

विगत दिवस आबकारी विभाग ने मुखबिर की सूचना पर अधारताल शराब दुकान में पहुंच कर जब स्टॉक चेक किया तो दुकान में 20 पेटी अंग्रेजी शराब ज्यादा पाई गई इस मामले में आबकारी विभाग ने ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की यह जानकारी जब आबकारी कंट्रोलर से मांगी गई तो उन्होंने बताया कि वह उस दिन छुट्टी पर थे आप एडीओ से जानकारी ले लो  कुल मिलकर कोई भी अधिकारी जानकारी देने से बच रहे हैं।

ओवर रेट शराब बिक्री का मुद्दा फिर उठा

रिश्वत कांड के बाद सूबे का आबकारी महकमा चर्चा में है। इस कांड के साथ ही शराब की ओवर रेट बिक्री का मुद्दा भी उभर कर सामने आया है। ठेकेदारों के इशारे पर हर प्रकार की बोतल पर 10 से 20 रुपये या उससे भी ज्यादा की अतिरिक्त कीमत वसूली जा रही है। प्रदेश में बीते साल लगभग 520 करोड़ से अधिक बोतल शराब की खपत हुई। यानी हर दिन औसतन 1 करोड़ 42 लाख 46 हजार 575 बोतलें बिकती हैं। यदि 20 रुपये प्रति बोतल के औसत से ओवर रेट वसूली की गणना की जाए, तो हर दिन का आंकड़ा 28 करोड़ 49 लाख 31 हजार 500 रुपये तक पहुंच जाता है। ओवर रेट वसूली की अनगिनत शिकायतों के बावजूद आबकारी विभाग चुप्पी साधे बैठा है। अफसरों की चिंता केवल शराब की बिक्री से मिलने वाले राजस्व पर ही केंद्रित है।

विशेष जांच टीम की कार्रवाई:

रिश्वत कांड सामने आने के बाद आबकारी आयुक्त ने विशेष जांच टीम भेजी थी। इस टीम ने जबलपुर संभाग में जांच कर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। अब मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश पर इस मामले में प्रमुख सचिव सख्त निर्णय ले सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, रिश्वत कांड में शामिल तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया जा सकता है, जबकि एक वरिष्ठ अधिकारी को हटाकर मुख्यालय में अटैच किए जाने की संभावना है।

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